ओबरा का राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल भवन तैयार, पर स्वास्थ्य सेवा का उद्देश्य अधूरा

अनिल कुमार अग्रहरी/ समाज जागरण

सोनभद्र। जनपद के विकासखंड चोपन अंतर्गत ओबरा नगर क्षेत्र के ग्राम बिल्ली मारकुंडी के खैरटिया टोला में निर्मित राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय ओबरा आज सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर एक गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। प्रदेश सरकार द्वारा लगभग 30 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत कर इस अस्पताल भवन का निर्माण कराया गया। इसका शुभारंभ 15 नवंबर 2025 को प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री के चोपन आगमन के दौरान किया गया। उद्देश्य स्पष्ट था—ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्र में रहने वाले लोगों को सुलभ, सुरक्षित और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना।


होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति विशेष रूप से उन वर्गों के लिए उपयोगी मानी जाती है, जहां दीर्घकालिक रोग, एलर्जी, त्वचा रोग, श्वसन संबंधी समस्याएं और बच्चों की सामान्य बीमारियां व्यापक रूप से पाई जाती हैं। यह उपचार पद्धति कम लागत, न्यूनतम दुष्प्रभाव और निरंतर देखभाल के सिद्धांत पर आधारित है। ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां आर्थिक संसाधन सीमित होते हैं, होम्योपैथिक चिकित्सा जनस्वास्थ्य की एक सशक्त कड़ी बन सकती है।
लेकिन ओबरा में निर्मित यह अस्पताल अपने मूल उद्देश्य से कोसों दूर दिखाई देता है। भवन का निर्माण पूरा हो चुका है—कमरे बने हैं, पंखे और लाइटें लगाई गई हैं—परंतु बिजली कनेक्शन अब तक उपलब्ध नहीं है। शौचालय निर्मित हैं, लेकिन बोरिंग अथवा स्थायी जलापूर्ति की व्यवस्था नहीं की गई। उद्घाटन के समय अस्थायी रूप से टंकी में पानी भरकर कार्य चलाया गया, जो स्थायी समाधान नहीं कहा जा सकता।


अस्पताल तक पहुंचने वाला मुख्य मार्ग अत्यंत जर्जर है, जिससे रोगियों, विशेषकर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को यहां तक पहुंचने में कठिनाई होती है। स्वास्थ्य सेवा केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसकी पहुंच, निरंतरता और कार्यशील व्यवस्था ही उसकी सफलता तय करती है।


चिकित्सकीय व्यवस्था की स्थिति भी स्पष्टता से परे है। अस्पताल में डॉक्टरों की नियमित नियुक्ति और कार्य-समय सारिणी सार्वजनिक रूप से निर्धारित नहीं है। कंपाउंडर की तैनाती भी व्यवहारिक स्तर पर प्रभावी नहीं दिखाई देती। परिणामस्वरूप यह अस्पताल कागजों में पूर्ण और धरातल पर निष्क्रिय संरचना बनकर रह गया है।


यह स्थिति इसलिए और गंभीर हो जाती है क्योंकि यह अस्पताल जिस क्षेत्र में निर्मित है, वह एक ग्रामीण और सामाजिक रूप से संवेदनशील इलाका है, जहां प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता सबसे अधिक है। सरकार द्वारा स्वीकृत धनराशि का मूल उद्देश्य केवल भवन खड़ा करना नहीं, बल्कि जनमानस के स्वास्थ्य स्तर में सकारात्मक सुधार लाना है।
स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं हो सकती। बिजली, पानी, सड़क, चिकित्सक, दवाएं और नियमित संचालन—ये सभी किसी भी अस्पताल की आत्मा होते हैं। इनके अभाव में करोड़ों या लाखों की लागत से बने भवन जनहित के बजाय प्रशासनिक औपचारिकता का प्रतीक बन जाते हैं।


आवश्यक है कि ओबरा के राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल को केवल उद्घाटन की स्मृति न बनाकर एक कार्यशील स्वास्थ्य केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। स्थायी बिजली कनेक्शन, जलापूर्ति, सड़क सुधार, चिकित्सकीय स्टाफ की नियमित नियुक्ति और समयबद्ध सेवाएं सुनिश्चित कर ही यह अस्पताल अपने उद्देश्य को पूरा कर सकता है। अन्यथा यह उदाहरण भविष्य में स्वीकृत होने वाली विकास योजनाओं की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगाता रहेगा।

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