शास्त्रीय संगीत और कत्थक नृत्य की उत्कृष्ट प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को किया भावविभोर
अभय कुमार मिश्रा, दैनिक समाज जागरण, ब्यूरो चीफ, कोल्हान झारखंड
जमशेदपुर (झारखंड) 25 दिसम्बर 2025: पंडित चंद्रकांत आप्टे फाउंडेशन के तत्वावधान में दिनांक 25 दिसंबर 2025 को माइकल जॉन सभागार, जमशेदपुर में आयोजित “पंडित चंद्रकांत आप्टे संगीत समारोह 2025” शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य प्रेमियों के लिए एक अविस्मरणीय सांस्कृतिक अनुभव सिद्ध हुआ। इस गरिमामय आयोजन में जमशेदपुर एवं कोलकाता से पधारे प्रतिष्ठित एवं उभरते कलाकारों ने अपनी सशक्त प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. रागिनी भूषण, निलेश आप्टे, पूर्वी घोष, सत्य प्रकाश तिवारी, प्रो. पंकज झा, शंकर नाथ झा एवं डॉ. सनातन दीप विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने स्वर्गीय पंडित चंद्रकांत आप्टे के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और शास्त्रीय कला के प्रति उनके योगदान को स्मरण किया।
प्रथम सत्र : शास्त्रीय गायन की सजी दरबार
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में जमशेदपुर के सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक बिरेन्द्र उपाध्याय ने अपने सधे हुए एवं भावपूर्ण गायन से श्रोताओं को शास्त्रीय संगीत की गहराइयों से परिचित कराया। उन्होंने विलंबित ख्याल एकताल में “वीर बजरंगी” तथा तीनताल में मध्य लय की बंदिश “शिव शंकर पार्वती पति” प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
उनके साथ तबले पर अमिताभ सेन, हारमोनियम पर प्रो. पंकज झा, तथा तानपुरा पर डॉ. अभिलाष चटर्जी एवं उत्कर्ष पांडे ने अत्यंत सटीक एवं प्रभावशाली संगत प्रदान की।
इसके पश्चात कोलकाता के उभरते शास्त्रीय गायक देबप्रिया अधिकारी ने राग मारवा एवं पीलू में भजन और ठुमरी प्रस्तुत कर अपनी सशक्त गायकी का परिचय दिया। हारमोनियम पर मोहम्मद अफ़लाक की संगत को श्रोताओं ने विशेष सराहना दी।
द्वितीय सत्र : कत्थक नृत्य की भावपूर्ण प्रस्तुति
कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कत्थक नृत्यांगना अलोकपर्णा गुहा (कोलकाता) ने गणेश वंदना से अपनी प्रस्तुति का शुभारंभ किया। इसके पश्चात तीनताल में पारंपरिक कत्थक बोलों की मोहक प्रस्तुति दी।
उन्होंने द्रौपदी चीरहरण प्रसंग तथा कृष्ण भजन के माध्यम से भाव, अभिनय और लय का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत किया। उनके साथ शिष्य सरबानी पोद्दार एवं आयुष गुना ने द्वैत नृत्य की सशक्त प्रस्तुति देकर दर्शकों की भरपूर प्रशंसा अर्जित की।
लखनऊ घराने की नजाकत, थाट, पाँवों की थिरकन एवं भाव-भंगिमाओं ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के संगीतमय एवं नृत्यात्मक चित्रण ने सभागार में उपस्थित दर्शकों को अलौकिक अनुभूति प्रदान की।
संगत में अंतरराष्ट्रीय तबलावादक शुभोज्योति गुहा, गायन में सौरव चक्रवर्ती तथा सितार पर संदीप नियोगी ने प्रस्तुति को विशेष ऊँचाई प्रदान की।
श्रोताओं की सराहना और आयोजन की सफलता
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संगीत एवं नृत्य प्रेमी उपस्थित रहे और पूरे आयोजन की भूरी-भूरी प्रशंसा की। यह समारोह शास्त्रीय कला के संरक्षण, संवर्धन एवं नई पीढ़ी तक उसकी पहुँच सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास सिद्ध हुआ।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. रागिनी भूषण, अरुण झा, लक्ष्मण झा, सुधा झा, डॉ. मनीष तुडिया, दीपक रंजन, राजीव रंजन, धर्मेश कुमार झा, मोहन ठाकुर, किशोर मिश्रा, विजय शंकर मिश्रा, सत्य प्रकाश तिवारी, प्रो. पंकज कुमार झा, डॉ. सनातन दीप, शंकर नाथ झा, बिरेन्द्र उपाध्याय, पद्मा झा, राजेश ठाकुर, संतोष ठाकुर एवं राव फाउंडेशन के सभी सदस्यों का सराहनीय सहयोग रहा।
पंडित चंद्रकांत आप्टे फाउंडेशन द्वारा आयोजित यह संगीत समारोह निश्चित रूप से जमशेदपुर के सांस्कृतिक परिदृश्य में एक उल्लेखनीय अध्याय के रूप में स्मरणीय रहेगा।



