google-site-verification: google2b21991adbe5cec3.html

*पति की दीर्घायु के लिए महिलाओं ने किया वट सावित्री व्रत, बरगद वृक्ष के नीचे किया पूजन-अर्चन**

*समाज जागरण – रंजीत तिवारी
रामेश्वर, वाराणसी।** आस्था और परंपरा से भरा हुआ **वट सावित्री व्रत** शनिवार को काशी के ग्रामीण क्षेत्रों **रामेश्वर, बरेमा, खेवलि, जंसा और गोसाईपुर** में बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह से ही गांवों में स्थित बरगद के पेड़ों के नीचे महिलाओं का जमावड़ा लगना शुरू हो गया था। सभी महिलाएं अपने पति की दीर्घायु की कामना करते हुए विधि-विधान से पूजा करती हुई नजर आईं।



महिलाओं ने वट वृक्ष के चारों ओर **कच्चे सूत से 7, 11, 51 या 108 परिक्रमा** की और दीप प्रज्वलित कर **सावित्री–सत्यवान की कथा** ध्यानपूर्वक सुनी। पूजा के दौरान **मौसमी फल, श्रृंगार सामग्री और पूजा सामग्रियां** चढ़ाने की परंपरा निभाई गई।

ज्योति, रागिनी तिवारी, सरस्वती देवी, गायत्री देवी सहित अन्य महिलाओं ने बताया कि वे अपने **सुहाग की रक्षा और पति की लंबी उम्र** के लिए वर्षों से यह व्रत करती आ रही हैं।

वहीं, **डॉ. शीतला प्रसाद त्रिपाठी** ने व्रत के महत्व को बताते हुए कहा कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत **माता सावित्री** के नाम पर पड़ा है। कथा के अनुसार माता सावित्री ने अपनी **बुद्धि, भक्ति और संकल्प शक्ति** के बल पर **यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त** कर लिए थे। तभी से यह व्रत पति की दीर्घायु का प्रतीक माना जाता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में वट सावित्री व्रत का यह पारंपरिक स्वरूप आज भी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ निभाया जा रहा है, जो भारतीय संस्कृति में नारी की शक्ति, समर्पण और आस्था का सुंदर उदाहरण हैँ.


Discover more from समाज जागरण

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

🛍️ Today’s Best Deals

(Advertisement)