हज़ारों कर्मियों के भविष्य पर संकट
समाज जागरण पटना जिला संवाददाता:- वेद प्रकाश
पटना/ बिहार में शिक्षा सेवक और तालिमी मरकज के पदों पर बहाली को लेकर पटना हाईकोर्ट ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने वर्ष 2008 की बहाली नियमावली को असंवैधानिक करार देते हुए उसे भूतलक्षी प्रभाव से रद्द कर दिया है। इस फैसले के बाद राज्य के हजारों शिक्षा सेवकों के भविष्य पर तलवार लटक गई है। पटना हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि 26 नवंबर 2008 को बनाई गई यह नीति भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 16 (सरकारी नौकरियों में अवसर की समानता) का सीधा उल्लंघन करती है। दरअसल, इस नीति के तहत शिक्षा सेवक और तालिमी मरकज के पदों पर बहाली के लिए केवल महादलित और मुस्लिम समुदाय के अति पिछड़ा वर्ग के लोगों को ही प्राथमिकता दी जाती थी। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सरकार किसी भी सरकारी पद पर किसी विशेष वर्ग या समूह को 100 प्रतिशत आरक्षण या हिस्सेदारी नहीं दे सकती। हाईकोर्ट ने इस नीति के तहत अब तक हुई सभी नियुक्तियों को रद्द करने का निर्देश दिया है। हालांकि, हजारों कार्यरत शिक्षा सेवकों के लिए कोर्ट ने एक बड़ी राहत भी दी है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जब तक राज्य सरकार नई नियमावली नहीं बना लेती और नई भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक वर्तमान में कार्यरत शिक्षा सेवकों को पद से नहीं हटाया जाएगा। राज्य सरकार को इस मामले में सिंगल बेंच के बाद डबल बेंच से भी कोई राहत नहीं मिली। कानूनी बाधाओं के बीच, सरकार ने फिलहाल सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के बजाय हाईकोर्ट में ही ‘रिव्यू याचिका’ (पुनर्विचार याचिका) दायर की है। इस कानूनी पेंच के कारण राज्य में टोला सेवक/शिक्षा सेवकों की चल रही नई बहाली प्रक्रिया फिलहाल पूरी तरह ठप हो गई है। इस फैसले ने बिहार के हजारों कर्मियों के बीच हलचल मचा दी है। लोग भविष्य को लेकर आशंकित हैं। अब सबकी निगाहें सरकार के अगले कदम और हाईकोर्ट की रिव्यू याचिका पर होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। अंतिम तस्वीर आगामी न्यायिक एवं सरकारी निर्णयों के बाद ही साफ हो पाएगी।
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