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आधार में जन्मतिथि सुधार में देरी पर पटना हाईकोर्ट सख्त

कहा- वैध दस्तावेज होने पर न लटकाएं मामले

समाज जागरण पटना जिला संवाददाता:- वेद प्रकाश

पटना/ पटना उच्च न्यायालय ने आधार कार्ड में जन्मतिथि सुधार में होने वाली अनावश्यक देरी पर कड़ी नाराजगी जताई है। न्यायमूर्ति अजीत कुमार की एकलपीठ ने प्रशांत रजक की याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि यदि आवेदक के पास वैध दस्तावेज उपलब्ध हैं, तो अधिकारियों को बिना किसी देरी के सुधार प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। याचिकाकर्ता प्रशांत रजक के आधार कार्ड में जन्मतिथि 24 जुलाई 2008 दर्ज थी, जबकि उनके मैट्रिक प्रमाणपत्र के अनुसार सही तिथि 24 जुलाई 2007 है। आवेदन के बावजूद सुधार न होने पर उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुझाव दिया कि आवेदक को यूआईडीएआई (UIDAI) के पटना क्षेत्रीय निदेशक के समक्ष उपस्थित होना चाहिए। अदालत ने अधिकारियों के ढुलमुल रवैये को खेदजनक बताते हुए कहा कि आम जनता को छोटे सुधारों के लिए कार्यालयों के चक्कर काटने पर मजबूर करना अनुचित है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि क्षेत्रीय निदेशक एक सप्ताह के भीतर आवेदक के दस्तावेजों का सत्यापन कर सुधार सुनिश्चित करें।

भविष्य में ऐसी परेशानियों से बचने के लिए विभाग को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए। वैध दस्तावेज होने पर अधिकारियों को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए, न कि प्रक्रिया को जटिल बनाना चाहिए। आधार कार्ड एक अनिवार्य पहचान दस्तावेज है, जिसकी त्रुटि सरकारी योजनाओं, बैंक कार्यों और आयकर रिटर्न में बाधा उत्पन्न करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च न्यायालय का यह आदेश प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाएगा और लंबित मामलों से जूझ रहे हजारों लोगों को बड़ी राहत देगा।


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