केंद्रीय नियमावली धरी की धरी
जिला प्रशासन को चुनौती देता जैन नमकीन
बिना मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट के धड़ल्ले से हो रही सप्लाई
इंट्रो
अनूपपुर जिले में खाद्य सुरक्षा की धज्जियां उड़ रही हैं। जैन नमकीन और उससे जुड़े मीठे उत्पाद बिना मैन्युफैक्चरिंग डेट और एक्सपायरी डेट के खुलेआम सप्लाई हो रहे हैं। केंद्रीय आबकारी विभाग की गाइडलाइन और खाद्य सुरक्षा कानून को ताक पर रखकर जनता की थाली में जहर परोसा जा रहा है। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर जिम्मेदार विभाग कब जागेगा और कब इस जहरीले खेल पर नकेल कसी जाएगी?
जितेंद्र शर्मा
अनूपपुर।जिले में बीते 5 वर्षों से तेजी से फलता-फूलता जैन नमकीन का कारोबार अब सवालों के घेरे में है। नमकीन ही नहीं बल्कि मिठाई और अन्य खाद्य सामग्री बिना उत्पादन तिथि और उपभोग की अंतिम तिथि के बाजार में सप्लाई की जा रही है। यह न सिर्फ उपभोक्ता अधिकारों का खुला उल्लंघन है, बल्कि केंद्रीय आबकारी विभाग और खाद्य सुरक्षा अधिनियम की गंभीर अवहेलना भी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि एक्सपायरी डेट के बिना बिक रहे खाद्य पदार्थ जहरीले साबित हो सकते हैं। डॉक्टरों की मानें तो ऐसे उत्पाद बच्चों और बुजुर्गों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने मामले का संज्ञान लिया है और जल्द जांच की बात कही है, लेकिन जनता का गुस्सा अब इस बात पर है कि आखिर अब तक प्रशासन क्यों चुप बैठा रहा है। लोगों की मांग है कि दोषियों पर तुरंत एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाए।
जहरीले कारोबार की खुली पोल
जैन नमकीन द्वारा बेचे जा रहे उत्पाद न सिर्फ उपभोक्ताओं के साथ छल हैं बल्कि सीधे-सीधे सेहत से खिलवाड़ हैं। पैकेजिंग पर न तो मैन्युफैक्चरिंग डेट है, न ही एक्सपायरी डेट, जिससे ग्राहक अंधेरे में खरीदारी करने को मजबूर हैं। बिना मानक के तैयार किए जा रहे इन उत्पादों का सीधा असर पाचन तंत्र और रोग प्रतिरोधक क्षमता पर पड़ सकता है। नाम न बताने की शर्त पर कई दुकानदारों का कहना है कि कंपनी सस्ते दाम और तेज सप्लाई का लालच देकर पूरे जिले में अपना माल खपाती है। सवाल यह है कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी और आबकारी विभाग के जिम्मेदार अब तक आंखें मूंदकर क्यों बैठे रहे? क्या यह मिलीभगत का खेल है या महज लापरवाही?
केंद्रीय नियमावली की उड़ रही धज्जियां
केंद्रीय आबकारी विभाग और FSSAI की गाइडलाइन साफ कहती है कि हर खाद्य उत्पाद पर निर्माण तिथि, बैच नंबर और एक्सपायरी डेट का उल्लेख अनिवार्य है। 2011 की पैकेजिंग और लेबलिंग विनियम की धारा स्पष्ट करती है कि बिना डेट वाले उत्पाद की बिक्री गैरकानूनी है। बावजूद इसके जिले में खुलेआम यह कारोबार फल-फूल रहा है। कानून की किताबों में दर्ज प्रावधान कागजों तक सीमित रह गए हैं और हकीकत में उनका मखौल उड़ाया जा रहा है। यह न केवल उपभोक्ता सुरक्षा के खिलाफ है, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान खड़ा करता है।
डॉक्टरों ने जताई गंभीर चिंता
चिकित्सकों का कहना है कि बिना डेट और एक्सपायरी के बेचे जा रहे खाद्य पदार्थ बेहद खतरनाक हैं। इनमें बैक्टीरिया, फंगस और हानिकारक रसायन पनपने का खतरा रहता है। ऐसे उत्पाद खाने से फूड पॉइजनिंग, आंतों का संक्रमण, लीवर और किडनी की बीमारियां तक हो सकती हैं। बच्चों और बुजुर्गों के लिए ये खाद्य सामग्री मौत का सबब बन सकती है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि अगर इस तरह का कारोबार तुरंत नहीं रोका गया तो आने वाले दिनों में जिले में स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थिति बन सकती है।
जनता में बढ़ रहा आक्रोश
गांव-गांव और शहर-शहर में अब लोग खुलकर सवाल उठा रहे हैं। उपभोक्ता संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि जैन नमकीन के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज कर उसका लाइसेंस रद्द किया जाए। साथ ही उन दुकानदारों पर भी कार्रवाई हो, जिन्होंने बिना मानक के उत्पाद बेचे है। लोगों का कहना है कि यदि सरकार और प्रशासन सख्त कदम नहीं उठाते तो वे सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। जनता का गुस्सा इस बात पर है कि आखिर जिम्मेदार विभाग इतने दिनों तक चुप क्यों रहा और क्या यह चुप्पी किसी बड़ी सांठगांठ की ओर इशारा नहीं करती?
कार्रवाई के नाम पर सिर्फ आश्वासन
खाद्य सुरक्षा अधिकारी अनूपपुर रावेंद्र सोनी ने भले ही संज्ञान लेने और जांच की बात कही हो, लेकिन जनता का भरोसा सिर्फ आश्वासनों से बहाल नहीं होगा। अब समय है कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और प्रशासन यह साबित करे कि कानून सबके लिए बराबर है। अगर नियमावली तोड़ने वालों पर नकेल नहीं कसी गई तो यह मामला पूरे प्रदेश में आग की तरह फैल सकता है। जनता का कहना है कि अब वे सिर्फ कार्रवाई नहीं बल्कि सजा देखना चाहते हैं।
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