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राक्षसों के अत्याचार से त्रस्त मुनि व देवताओं की रक्षा के लिए राम ने लिया अंशों सहित अवतार

संवाददाता आनन्द कुमार।
दैनिक समाज जागरण

दुद्धी/ सोनभद्र। दुद्धी विकासखंड के विंढमगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत जोरुखाड़ ग्राम पंचायत में चल रहे नौ दिवसीय श्रीरामचरितमानस नवाह परायण महायज्ञ में शनिवार को परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। आचार्य पंडित तेजभान त्रिपाठी एवं सह आचार्य पंडित अमन शास्त्री ने विधि पूर्वक आह्वाहित देवी देवताओं की वेदमंत्रों से पूजा की और हवन कुंड में यजमान के साथ आहुतियां डाली। इस दौरान कथावाचक पंडित विवेकानंद जी महाराज ने रावण के बढ़ते अत्याचार और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामचंद्र जी के अंशों सहित अवतार लेने की कथा सुनाते हुए कहा कि पुलस्त्य ॠषि के वंशज होने पर भी ब्राह्मण के शाप के कारण रावण, कुंभकर्ण आदि राक्षस हुए जो देवताओं को अपना शत्रु समझते हैं। वहीं रावण का छोटा भाई विभीषण महान हरि भक्त है और सदा रामनाम जपता है। राक्षसों के बढ़ते अत्याचार से दुखी पृथ्वी और देवतागण ब्रह्मा जी के पास जाते हैं और उपाय पूछे जाने पर उन्हें भगवान के शरणागत होने का परामर्श देते हैं। देवता गण बड़ी देर तक सोचते रहे कि श्री हरि को कहां ढूंढा जाये। भगवान शिव पार्वती जी से कहते हैं कि उस समय मैने उन्हें वहीं से करुण पुकार लगाने की सलाह दी क्योंकि परमात्मा सर्वत्र व्याप्त है और भक्ति व प्रेम से सनी हुई करुण पुकार सुनकर वे तत्क्षण प्रकट हो जाते हैं। देवताओं की पुकार सुनकर आकाशवाणी हुई कि हे देवताओं! अब आपको डरने की आवश्यकता नहीं है। आकाशवाणी ने कहा कि मैं अयोध्या में अंशों सहित प्रकट होकर पृथ्वी सहित मुनि व देवताओं का क्लेश दूर करुंगा। राजा दशरथ की पुत्र चिंता एवं गुरु वशिष्ठ के कहने पर श्रृंगी ॠषि द्वारा पुत्रेष्टि यज्ञ कराने के फलस्वरूप अग्नि देवता ने उन्हें खीर दिया जिसे राजा दशरथ ने भाग करके कौशल्या आदि रानियों में बांट दिया। शुभ मुहूर्त आने पर भगवान अपने अंशों सहित दशरथ के राजमहल में अवतरित होते हैं। गुरु वशिष्ठ ने इनके नाम क्रमशः राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न रखा। भाइयों सहित राम जन्म होते ही महल में खुशियां फैल गई और पूरे अयोध्या में उत्सव मनाया जाने लगा। इस मौके पर यज्ञाधीश स्वामी रामानंद जी महाराज, दिनेश यादव, भगवानदास गोंड़, राजेश गोंड़, अशोक कुमार, गुड्डू भगत, रामकिशुन बाबा जी, राजमणि यादव, सूरज पनिका, दसंई यादव, मुरली गुप्ता, विद्यापति विश्वकर्मा आदि उपस्थित रहे।


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