रतिया, 7 मई (सुरेश मंगला)। आनंदम फाउंडेशन के पावन सान्निध्य में महर्षि आलोक जी का संबोधि दिवस मंगलवार को बुढलाडा रोड स्थित जैन समाधि प्रांगण, रतिया में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने महर्षि जी के सान्निध्य में आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया।

जैन समाधि परिसर उस समय भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा, जब महर्षि आलोक जी का समारोह में मंगलमय आगमन हुआ। श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा और जयघोष के साथ उनका स्वागत किया। कार्यक्रम में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली, चंडीगढ़ और महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।
महोत्सव का शुभारंभ महर्षि आलोक जी की पावन आरती से हुआ। इसके बाद अपने प्रेरणादायी प्रवचनों में महर्षि जी ने संबोधि का महत्व बताते हुए कहा कि आत्म-बोध ही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि त्याग, तप और करुणा के मार्ग पर चलकर ही मानव जीवन सार्थक बनता है।
महर्षि आलोक जी ने कहा कि “वर्तमान में जीना ही ध्यान है।” उन्होंने समझाया कि जब मन न बीते हुए कल के पछतावे में उलझे और न आने वाले कल की चिंता में भटके, तभी व्यक्ति अपने वास्तविक स्वरूप को पहचान पाता है। श्वास-श्वास में सजगता ही संबोधि का मार्ग है।
उन्होंने काम, क्रोध, लोभ और मोह को त्यागकर सत्य, अहिंसा और प्रेम को जीवन में अपनाने का संदेश दिया। “नर सेवा ही नारायण सेवा” का संदेश देते हुए उन्होंने सभी को प्राणीमात्र के कल्याण के लिए समर्पित होने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान भजनांजलि की मधुर प्रस्तुतियों और सामूहिक ध्यान ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। अंत में महाप्रसाद वितरित किया गया। आयोजन समिति ने महर्षि आलोक जी एवं सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में आयोजन समिति के पदाधिकारी, नगर के गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में साधक उपस्थित रहे।



