शहडोल। जिले की जनपद पंचायत सोहागपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत खैरहा इन दिनों गंभीर अनियमितताओं को लेकर चर्चा में है। पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर फर्जी बिलों के भुगतान और सामुदायिक भवन में अवैध वसूली के आरोप सामने आए हैं, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
फर्जी बिल भुगतान का मामला उजागर
जानकारी के अनुसार खैरहा पंचायत में सरपंच श्रीमती दुईजी बाई कोल और सचिव चंद्रिका शर्मा के कार्यकाल में फर्जी बिलों के भुगतान का मामला सामने आया है। आरोप है कि 31 मार्च 2025 को सारंगपुर पंचायत के नाम से बनाए गए बैनर के दो बिल, प्रत्येक 500 रुपये के, अग्रवाल स्टेशनरी बुढार के नाम से जारी किए गए, जिनका भुगतान खैरहा पंचायत से किया गया।

*दूसरी पंचायत का बिल, यहां से भुगतान*
बताया जा रहा है कि संबंधित बिल सारंगपुर पंचायत से जुड़ा था, जहां सरपंच श्रीमती मीना कोल हैं। नियमानुसार बिल पर उनके हस्ताक्षर होना चाहिए था, लेकिन आरोप है कि खैरहा पंचायत की सरपंच श्रीमती दुईजी बाई कोल द्वारा कथित रूप से फर्जी हस्ताक्षर कर भुगतान प्रक्रिया पूरी की गई। उल्लेखनीय है कि सचिव चंद्रिका शर्मा के पास वर्तमान में खैरहा के साथ-साथ सारंगपुर पंचायत का भी प्रभार है।
*बैठक और ग्रामसभा सिर्फ कागजों तक सीमित*
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में न तो नियमित पंचों की बैठक होती है और न ही ग्राम सभा का आयोजन किया जाता है। केवल कागजी कार्रवाई पूरी करने के लिए जरूरतमंद हितग्राहियों से रजिस्टर में हस्ताक्षर करा लिए जाते हैं। पंचों को बिना जानकारी दिए ही दस्तावेजों में उनकी सहमति दर्शा दी जाती है, जिससे पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
*सामुदायिक भवन में अवैध वसूली के आरोप*
खैरहा पंचायत में सामुदायिक भवन के उपयोग को लेकर भी गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत द्वारा एक दिन के उपयोग के लिए 3500 रुपये किराया, 5000 रुपये डिपॉजिट और 400 रुपये अतिरिक्त देखरेख शुल्क वसूला जा रहा है, जो ग्रामीण क्षेत्र के हिसाब से अत्यधिक है।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले शादी-विवाह जैसे आयोजनों के लिए स्कूल भवन उपलब्ध हो जाता था, लेकिन अब उन्हें मजबूरी में पंचायत के सामुदायिक भवन का सहारा लेना पड़ रहा है, जहां भारी शुल्क लिया जा रहा है।
*पंचों की सहमति के बिना तय हो रही दरें*
पंचायत प्रतिनिधियों का आरोप है कि सामुदायिक भवन के किराया निर्धारण में उनकी कोई भूमिका नहीं है। पंचायत नियमों के अनुसार इस तरह के निर्णय ग्राम सभा या पंचों की बैठक में लिए जाने चाहिए, लेकिन यहां सरपंच और सचिव द्वारा मनमाने तरीके से दरें तय की जा रही हैं।
*ग्रामीणों में बढ़ता असंतोष*
ग्रामीणों का कहना है कि बेटियों की शादी जैसे सामाजिक कार्यों के लिए भी भारी भरकम राशि वसूली जा रही है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। उनका मानना है कि किराया अधिकतम 1100 रुपये होना चाहिए, जो ग्रामीण परिस्थितियों के अनुरूप हो।
*जांच की आवश्यकता*
इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की आवश्यकता है। यदि जल्द ही सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में इसका असर देखने को मिलेगा।
इनका कहना है
चार पांच सौ का कोई घोटाला नहीं होता हैं गलती से भुक्तान हो गया है
सचिव चंद्रिका शर्मा



