दैनिक समाज जागरण 05.04.2026 चांद कुमार लायेक (ब्यूरो चीफ) पूर्वी सिंहभूम जमशेदपुर
जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने टाटानगर जंक्शन पर ट्रेनों की लगातार हो रही लेटलतीफी को लेकर रेलवे अधिकारियों के साथ कड़ा रुख अपनाया है। रविवार को चक्रधरपुर डिवीजन के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) के साथ हुई बैठक में उन्होंने साफ कहा कि यात्रियों की परेशानी दूर करने के लिए तत्काल प्रभाव से कदम उठाए जाएं और दो-चार दिनों के भीतर इसका प्रत्यक्ष परिणाम दिखाई दे।
यह बैठक टाटानगर जंक्शन से आने-जाने वाली यात्री ट्रेनों की लेटलतीफी के विरोध में आगामी 7 अप्रैल को प्रस्तावित नागरिक धरना के संदर्भ में आयोजित की गई थी। बैठक में सीनियर डीसीएम, एरिया मैनेजर, डिवीजनल इंजीनियर और आरपीएफ प्रभारी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान रेलवे अधिकारियों ने स्वीकार किया कि पिछले कुछ समय से यात्री गाड़ियां टाटानगर जंक्शन पर काफी विलंब से पहुंच रही हैं। उन्होंने इसके पीछे विभिन्न परिचालन संबंधी कारणों का उल्लेख करते हुए बताया कि समस्या के स्थायी समाधान के लिए योजनाएं बनाई जा रही हैं, जिन्हें लागू करने में कुछ महीनों का समय लगेगा।
हालांकि, इस पर सरयू राय ने स्पष्ट रूप से असहमति जताई। उन्होंने कहा कि जनता को लंबी अवधि की योजनाओं से ज्यादा तत्काल राहत की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि ऐसी क्या रणनीति है, जिसके तहत आने वाले दो-चार दिनों में ही ट्रेनों की लेटलतीफी कम की जा सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जनधरना और वर्तमान वार्ता का मुख्य उद्देश्य केवल यही है कि यात्रियों को तुरंत राहत मिले।
सरयू राय ने रेलवे अधिकारियों से पिछले तीन से चार महीनों के दौरान टाटानगर जंक्शन पर पहुंचने वाली प्रमुख ट्रेनों के विलंब का विस्तृत डेटा प्रस्तुत करने को कहा। उन्होंने कहा कि रेलवे की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण कर यह स्पष्ट किया जाए कि किन कारणों से देरी हुई और उन कारणों को दूर करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।
इस पर डीआरएम ने अपने अधीनस्थ अधिकारियों को निर्देश दिया कि सोमवार तक सभी संबंधित आंकड़ों का विश्लेषण कर रिपोर्ट सरयू राय को उपलब्ध कराई जाए। इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि ट्रेनों की देरी को कम करने के लिए तत्काल स्तर पर क्या सुधार संभव हैं।
बैठक के दौरान सरयू राय ने यात्रियों की समस्याओं को विस्तार से रखते हुए कहा कि ट्रेनों की लगातार देरी से आम जनता को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि कुछ मालगाड़ियों को सीमित समय के लिए रोककर यात्री ट्रेनों को प्राथमिकता दी जाए, तो लेटलतीफी में काफी कमी लाई जा सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि रेलवे अधिकारियों द्वारा किए जा रहे वादों पर तब तक भरोसा नहीं किया जा सकता, जब तक कि उन्हें व्यवहारिक रूप में लागू करके नहीं दिखाया जाता। जनता का विश्वास तभी बहाल होगा, जब उन्हें तुरंत सुधार का अनुभव होगा।
अंत में सरयू राय ने स्पष्ट किया कि 7 अप्रैल को प्रस्तावित धरना अपने निर्धारित समय और स्थान पर ही आयोजित किया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि रेलवे प्रशासन सोमवार को सौंपी जाने वाली रिपोर्ट में यह स्पष्ट करेगा कि ट्रेनों की लेटलतीफी को दो-चार दिनों के भीतर कैसे समाप्त किया जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि टाटानगर जंक्शन पर ट्रेनों की लेटलतीफी का मुद्दा अब गंभीर रूप ले चुका है और जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ आम जनता भी इसके समाधान के लिए ठोस कार्रवाई की अपेक्षा कर रही है।



