आध्यात्मिक आभा में सजी सादगी, 17 युगलों का मंगलमय वैवाहिक बंधन

पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए संतुलित जीवन जिएं : सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं राजपिता रमित जी

(रघुनंदन पराशर / दैनिक समाज जागरण, चीफ ब्यूरो पंजाब)

जैतो, 1 मई। मानवता, एकत्व और आध्यात्मिक आदर्शों के संदेश को साकार करते हुए Sant Nirankari Mission द्वारा दिल्ली के Ground No. 8 Burari Road में भव्य एवं गरिमामय सादा सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन किया गया। यह आयोजन परम श्रद्धेय Satguru Mata Sudiksha Ji Maharaj एवं Nirankari Rajpita Ramit Ji की कृपामयी उपस्थिति और आशीर्वाद से आध्यात्मिक आभा से आलोकित हो उठा।

इस पावन अवसर पर 17 नवयुगलों ने एक ही स्थल पर वैवाहिक बंधन में बंधकर अपने नए जीवन की शुरुआत की। सभी नवदंपत्तियों ने प्रेम, समर्पण और आध्यात्मिक मूल्यों के साथ गृहस्थ जीवन में प्रवेश किया। समारोह सरलता, समानता, सौहार्द और मानवीय एकता का प्रेरणादायी उदाहरण बना।

भक्ति-रस से ओतप्रोत वातावरण में जयमाला, सांझा हार और निरंकारी लावों के मधुर गायन के साथ विवाह संस्कार सम्पन्न हुए। इस आयोजन में इंग्लैंड, दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश से आए युगल विवाह सूत्र में बंधे।

इस अवसर पर सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने नवदंपत्तियों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि यह समारोह केवल 17 जोड़ों का विवाह नहीं, बल्कि परिवारों और आत्माओं के सच्चे मिलन का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि विवाह केवल साथ रहने का नाम नहीं, बल्कि जिम्मेदारियों को मिलकर निभाने का संकल्प है।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार सांझा हार एकता का प्रतीक है, उसी प्रकार पति-पत्नी को बिना भेदभाव के जीवन के हर दायित्व को कंधे से कंधा मिलाकर निभाना चाहिए। परिवार के साथ-साथ समाज के प्रति भी अपनी जिम्मेदारियों को समझना आवश्यक है।

सतगुरु माता जी ने कहा कि यदि किसी एक जीवनसाथी का रुझान सेवा, सत्संग और सुमिरन से कम होने लगे, तो दूसरे का कर्तव्य है कि वह उसे प्रेरित करे। जब दोनों मिलकर आध्यात्मिक और सामाजिक जीवन में संतुलन बनाए रखते हैं, तभी वैवाहिक जीवन पूर्णता को प्राप्त करता है।

उन्होंने अंत में सभी नवयुगलों के सुखद एवं मंगलमय जीवन की कामना करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों को भी समान प्राथमिकता दे। यही सोच प्रेमपूर्ण, संतुलित और सफल जीवन की आधारशिला है।

यह आयोजन उपस्थित श्रद्धालुओं एवं परिवारों के लिए एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव बन गया, जिसने यह संदेश दिया कि सादगी, समर्पण और प्रेम ही सुखी जीवन की वास्तविक नींव हैं।

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