वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो किशनगंज।
2 अगस्त। जन्मजात हृदय रोग (कॉन्जेनिटल हार्ट डिजीज) से पीड़ित बच्चों के बेहतर उपचार के लिए बिहार सरकार की बाल हृदय योजना के तहत रविवार को किशनगंज जिले के छह बच्चों को तीन एंबुलेंस के माध्यम से पटना स्थित जयप्रभा मेदांता सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल भेजा गया। वहां आयोजित विशेष जांच शिविर में बाल हृदय रोग विशेषज्ञ उनकी विस्तृत जांच करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर निःशुल्क ऑपरेशन सहित आगे के उपचार की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
जन्मजात हृदय रोग बच्चों में होने वाली गंभीर बीमारियों में शामिल है। समय पर पहचान और इलाज नहीं मिलने पर यह उनके शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक विकास के साथ जीवन के लिए भी खतरा बन सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार की बाल हृदय योजना के तहत जांच, ऑपरेशन, दवा, अस्पताल में भर्ती, परिवहन और उपचार के बाद फॉलो-अप तक की सभी सुविधाएं पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं।
छह मरीजों को चिकित्सकीय निगरानी में भेजा गया
डीपीएम डॉ. मुनाजिम ने बताया कि पटना भेजे गए बच्चों में बहादुरगंज की दो वर्ष छह माह की बिद्या कुमारी, सात माह की आराध्या कुमारी, ठाकुरगंज के 17 वर्षीय राजेंद्र कुमार राजभर, टेढ़ागाछ के चार माह के श्रेयांश कुमार मांझी, पोठिया के दो वर्षीय सोहन हरिजन तथा किशनगंज प्रखंड के आठ वर्षीय अनाश राजा शामिल हैं। सभी मरीजों को चिकित्सकीय निगरानी में सुरक्षित रवाना किया गया।
हर हजार नवजात में 8 से 10 बच्चे होते हैं प्रभावित
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि प्रत्येक एक हजार नवजात शिशुओं में लगभग आठ से दस बच्चे जन्मजात हृदय रोग से प्रभावित होते हैं। भारत में हर वर्ष करीब दो से ढाई लाख बच्चे इस बीमारी के साथ जन्म लेते हैं। उन्होंने कहा कि समय पर पहचान और उपचार मिलने पर अधिकांश बच्चे सामान्य जीवन जी सकते हैं, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए इसका इलाज बेहद महंगा होता है। ऐसे में बाल हृदय योजना उनके लिए जीवनरक्षक साबित हो रही है।
आरबीएसके की स्क्रीनिंग से हो रही समय पर पहचान
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांवों, आंगनबाड़ी केंद्रों और विद्यालयों में नियमित स्वास्थ्य जांच करती हैं। जांच के दौरान जिन बच्चों में जन्मजात हृदय रोग के लक्षण मिलते हैं, उन्हें विशेषज्ञ चिकित्सकों से जांच कराकर बाल हृदय योजना के तहत रेफर किया जाता है। योजना के अंतर्गत जांच, ऑपरेशन, अस्पताल में भर्ती, दवाइयां, भोजन तथा आने-जाने की सुविधा पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती है।
2021 से अब तक 47 बच्चों को मिला लाभ
जिला स्वास्थ्य विभाग के अनुसार वर्ष 2021 से अगस्त 2026 तक जिले के 47 जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को राज्य के विभिन्न सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में निःशुल्क उपचार के लिए भेजा गया है। इनमें वर्ष 2021 में 3, वर्ष 2022 में 4, वर्ष 2023 में 7, वर्ष 2024 में 11, वर्ष 2025 में 16 तथा वर्ष 2026 में अब तक 6 बच्चों को योजना का लाभ मिला है। वर्ष 2025 में सर्वाधिक 16 बच्चों का सफल रेफरल किया गया।
डीएम बोले— कोई भी बच्चा उपचार से वंचित नहीं रहेगा
जिला पदाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि जिले का कोई भी बच्चा आर्थिक अभाव के कारण जीवनरक्षक उपचार से वंचित न रहे। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के माध्यम से गांव-गांव और प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र तक स्क्रीनिंग को और प्रभावी बनाने का निर्देश दिया, ताकि जन्मजात विकृतियों की समय रहते पहचान हो सके।
स्वस्थ बचपन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि प्रशिक्षित चिकित्सकीय दल लगातार बच्चों की जांच कर रहे हैं और जिन बच्चों में जन्मजात हृदय रोग की पुष्टि होती है, उन्हें बाल हृदय योजना के माध्यम से सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में भेजा जाता है। उन्होंने कहा कि योजना ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए विशेषज्ञ उपचार का रास्ता आसान बनाया है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार बाल हृदय योजना अब केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि जरूरतमंद परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बन चुकी है। समय पर स्क्रीनिंग, शीघ्र रेफरल और विशेषज्ञ उपचार के माध्यम से यह योजना बच्चों को नया जीवन देने के साथ-साथ बाल मृत्यु दर में कमी लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
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