एसपी, आईजी, डीजीपी, गृह विभाग व एनएचआरसी को भेजा 13 पृष्ठों का प्रतिवेदन, डिजिटल साक्ष्यों व स्वतंत्र जांच की मांग
वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो किशनगंज।
02 अगस्त।
आरटीआई एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता मोहम्मद अंसार खान ने किशनगंज थाना कांड संख्या 863/2026 की जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए पुलिस अधीक्षक, पुलिस महानिरीक्षक (पूर्णिया), पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), बिहार सरकार के गृह विभाग तथा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) को 13 पृष्ठों का विस्तृत प्रतिवेदन भेजा है। प्रतिवेदन में मामले की स्वतंत्र, पारदर्शी, वैज्ञानिक एवं साक्ष्य-आधारित जांच कराने तथा अनुसंधान पदाधिकारी बदलने की मांग की गई है।

प्रतिवेदन में अंसार खान ने कहा है कि वे लंबे समय से सूचना का अधिकार, मानवाधिकार, भ्रष्टाचार और पर्यावरण संरक्षण जैसे जनहित के मुद्दे उठाते रहे हैं। उनके अनुसार, पूर्व में उनकी शिकायतों के आधार पर कई सरकारी अधिकारियों एवं कर्मियों के विरुद्ध जांच, आर्थिक दंड और प्रशासनिक कार्रवाई हो चुकी है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि मोतीबाग डंपिंग यार्ड मामले में उनकी शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लेते हुए बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) तलब की है।
आवेदन में दावा किया गया है कि बिहार सरकार के गृह विभाग (विशेष शाखा) ने Whistle Blowers Protection Act, 2014 के तहत उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक को पत्र जारी किया था। साथ ही यह भी कहा गया है कि वर्तमान कांड के अनुसंधान पदाधिकारी उपनिरीक्षक प्रिंस प्रभाकर सिंह के विरुद्ध भी उन्होंने पहले शिकायत की थी, जिस पर गृह विभाग ने सक्षम पुलिस प्राधिकार को जांच एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र भेजा था। ऐसे में उसी पदाधिकारी द्वारा वर्तमान मामले की जांच किए जाने से निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगने की बात कहते हुए जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी अथवा विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंपने की मांग की गई है।
प्रतिवेदन में कहा गया है कि 31 जुलाई 2026 की घटनाओं की वास्तविकता का सत्यापन Google Maps Timeline, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन (सीडीआर), जीपीएस डेटा तथा अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर किया जा सकता है। आवेदन में रेलवे स्टेशन क्षेत्र, कबीर चौक स्थित सरकारी सीसीटीवी और कजलामनी क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज को तत्काल सुरक्षित कर वैज्ञानिक जांच कराने का अनुरोध किया गया है।
शिकायतकर्ता ने सह-अभियुक्त शादन अंजर के संबंध में भी दावा किया है कि वह घटना से पूर्व दिल्ली में रहकर NEET (UG)-2026 की तैयारी कर रहे थे। उनके प्रवेश पत्र, यात्रा विवरण, मोबाइल लोकेशन और घर पर लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है।
प्रतिवेदन के अनुसार, जिस परिसर से कथित बरामदगी दर्शाई गई है, उससे संबंधित वैध किराया अनुबंध (रेंट एग्रीमेंट) भी आवेदन के साथ संलग्न किया गया है। आवेदन में कहा गया है कि परिसर वैध रूप से किराये पर दिया गया था, इसलिए उसके वास्तविक उपयोग और कब्जे से जुड़े तथ्यों की भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
अंसार खान ने अपने प्रतिवेदन में सभी सक्षम प्राधिकारियों एवं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से अनुरोध किया है कि मामले का निष्कर्ष केवल आरोपों के आधार पर नहीं, बल्कि स्वतंत्र, वैज्ञानिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर निकाला जाए तथा पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्यों के अभाव में किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कठोर कार्रवाई नहीं की जाए।
हालांकि, इस आवेदन पर पुलिस या जिला प्रशासन की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
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