ब्यूरो चीफ़/ विजय कुमार अग्रहरी। दैनिक समाज जागरण
घोरावल/ सोनभद्र। सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है। सोमवार को सिद्धेश्वर महादेव सेवा संस्थान महुआंव पाण्डेय की सदस्य व अन्य महिलाओं द्वारा विधि विधान से पूजन कर पर्व मनाया। संस्थान की अध्यक्ष नीलम द्विवेदी ने कहा कि सोमवार चंद्र देवता कों समर्पित दिन है। भगवान चंद्र को मन का कारक माना जाता है अतः इस दिन अमावस्या पड़ने का अर्थ है की यह दिन मन सम्बन्धित दोषो को दूर करने के लिए उत्तम है। वहीं आचार्य रजनीश पाण्डेय ने बताया कि हमारे शास्त्रो में चंद्रमा को ही दैहिक,दैविक और भौतिक कष्टो का कारक माना जाता है, अतः यह पूरे वर्ष में एक या दो बार ही पड़ने वाले पर्व का बहुत अधिक महत्त्व माना जाता है। विवाहित स्त्रियों के द्वारा इस दिन पतियों की दीर्घ आयु के लिये व्रत का विधान है।
सोमवती अमावस्या कलयुग के कल्याणकारी पर्वो में से एक है, लेकिन सोमवती अमावस्या को अन्य अमावस्याओं से अधिक पुण्य कारक मानने के पीछे भी पौराणिक एवं शास्त्रीय कारण है।सोमवार को भगवन शिव एवं चंद्र का दिन माना जाता है। सोम यानि चन्द्रमा अमावस्या और पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा यानि सोमांश या अमृतांश सीधे-सीधे पृथ्वी पर पड़ता है।
शास्त्रो के अनुसार सोमवती अमावस्या के दिन चन्द्रमा का अमृतांश पृथ्वी पर सबसे अधिक पड़ता है।
श्री पाण्डेय ने आगे कहा कि अमावस्या अमा और वस्या दो शब्दों से मिलकर बना है। शिव पुराण में इस संधि विच्छेद को भगवान् शिव ने माँ पार्वती को समझाया था। क्योंकि सोम को अमृत भी कहा जाता है अमा का अर्थ है एकत्रित करना और वास को वस्या कहा गया है।यानि जिसमे सभी वास करते हो वह अति पवित्र अमावस्या कहलाती है। यह भी कहा जाता है की सोमवती अमावस्या में भक्तो को अमृत की प्राप्ति होती है।
निर्णय सिंधु व्यास के वचनानुसार इस दिन मौन रहकर स्नान-ध्यान करने से सहस्त्र गौ दान का पूण्य मिलता है।
इस अवसर पर महुआंव पाण्डेय गांव की तमाम महिलाएं मौजूद रहीं।

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