सोनभद्र के सोढ़ा-दुपटिया में जुटीं दर्जनों सांस्कृतिक टोलियां, पारंपरिक कर्मा नृत्य और लोककला के जरिए कलाकारों ने दिखाई अपनी विरासत
समाज जागरण | ब्यूरो चीफ विजय कुमार अग्रहरी
सोनभद्र। जनजातीय संस्कृति, लोककला और पारंपरिक विरासत को संरक्षित करने के उद्देश्य से सेवा समर्पण संस्थान सोनभद्र के तत्वावधान में डॉ. कार्तिक उरांव की जन्म शताब्दी के अवसर पर गुरुवार को विकास खंड चतरा के सोढ़ा, दुपटिया में जनजातीय सांस्कृतिक महोत्सव यानी कर्मा महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र की दर्जनों सांस्कृतिक टोलियों ने भाग लेकर अपनी पारंपरिक कला, संस्कृति और रीति-रिवाजों की झलक प्रस्तुत की।
कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान बिरसा मुंडा और बालासाहब देशपांडे के चित्रों पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। आयोजन समिति की ओर से अतिथियों का बैज अलंकरण और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मान किया गया।
जनजातीय संस्कृति को पहचान दिलाने का मंच बना महोत्सव
कार्यक्रम में अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम उत्तर प्रदेश के संगठन मंत्री आनंद जी, उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग के उपाध्यक्ष जीत सिंह खरवार, सेवा समर्पण संस्थान के अध्यक्ष जे.सी. विमल सिंह और सदर विधायक भूपेश चौबे सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
संगठन मंत्री आनंद जी ने कहा कि जनजातीय समागम का उद्देश्य अपनी कला और संस्कृति की पहचान को बनाए रखना है। ऐसे आयोजनों में कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने और पारंपरिक विरासत को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है।
वहीं, आयोग के उपाध्यक्ष जीत सिंह खरवार ने कहा कि जनजातीय कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक पहचान है। बोली और भाषा किसी भी समुदाय की पहचान को मजबूत बनाती हैं। उन्होंने डॉ. कार्तिक उरांव की जन्म शताब्दी पर कर्मा महोत्सव के आयोजन को जनजातीय समाज के लिए गौरव का विषय बताया।
लखनऊ तक गूंज रही कर्मा नृत्य की ताल: भूपेश चौबे
सदर विधायक भूपेश चौबे ने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद क्षेत्र में कर्मा महोत्सव जैसे आयोजन बेहतर तरीके से किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के कलाकारों की प्रतिभा अब स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि लखनऊ तक कर्मा नृत्य की पहचान पहुंच रही है। यह क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
कार्यक्रम को श्रवण गोंड सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। सभी ने जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और लोककलाओं को संरक्षित करने के महत्व पर अपने विचार रखे।
दर्जनों टोलियों ने प्रस्तुत की पारंपरिक संस्कृति
महोत्सव के संयोजक मुन्ना धांगर ने बताया कि आयोजन में भीखमपुर, सिलथम, दुपटिया और आदिवासी इंटर कॉलेज सहित क्षेत्र की दर्जनों सांस्कृतिक टोलियों ने भाग लिया। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से जनजातीय समाज की परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और योगदान को प्रदर्शित किया।
इस अवसर पर वनवासी कल्याण आश्रम के संगठन मंत्री रवींद्र जी, रामसेवक खरवार, शिवम मिश्रा, प्रवीण जी, डॉ. अंजनी द्विवेदी, शक्ति सिंह, पूर्व विधायक तीर्थराज, श्रवण गोंड, सतीश श्रीवास्तव और ज्योती खरवार सहित अनेक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कर्मा महोत्सव ने जनजातीय लोककला और सांस्कृतिक परंपराओं को मंच प्रदान करने के साथ नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने का संदेश दिया।
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