समाज जागरण/सन्तोष कुमार
सोनभद्र। बभनी ब्लॉक के चैनपुर, पोखरा और म्योरपुर ब्लॉक के धरतीडाड़ क्षेत्र में लगातार हो रही तेज बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में पानी भरने से सब्जियों की तैयार फसलें सड़कर नष्ट हो गई हैं। बड़े पैमाने पर सब्जी की खेती करने वाले किसानों को लाखों रुपये के नुकसान का अनुमान है।
सबसे अधिक नुकसान उन किसानों को हुआ है, जिन्होंने आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक तरीके से सब्जी उत्पादन में अपनी पूंजी लगाई थी। प्रभावित किसानों में संतोष कुमार दुबे, धर्मेंद्र जायसवाल, जय कुमार सिंह, लेखंशु गुप्ता, रामा, संतोष गुप्ता, मुन्नी लाल गुप्ता और मंशाराम गुप्ता समेत कई किसान शामिल हैं।
जलभराव से तैयार फसलें हुईं बर्बाद
किसानों ने बेहतर उत्पादन की उम्मीद में ड्रिप इरिगेशन यानी टपका सिंचाई पद्धति का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया था। इसके अलावा अच्छे बीज, खाद और महंगे कृषि उपकरणों पर भी काफी निवेश किया गया था। फसलें तैयार होकर कटाई के करीब थीं, लेकिन लगातार बारिश और खेतों में जलभराव के कारण किसानों की पूरी मेहनत पर पानी फिर गया।
प्रभावित क्षेत्रों में टमाटर, खीरा, बरबटी, लौकी और करेला की फसल को भारी नुकसान हुआ है। कई खेतों में सब्जियां सड़कर नष्ट हो गई हैं। इसके अलावा उड़द और तिली यानी तिल की फसल भी बारिश की चपेट में आने से प्रभावित हुई है।
कर्ज चुकाने का संकट
किसानों का कहना है कि खेती में बड़ी पूंजी लगाने के बाद फसल खराब होने से अब उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। परिवार के भरण-पोषण के साथ बैंक और साहूकारों से लिए गए कर्ज की अदायगी की चिंता भी किसानों को सताने लगी है।
किसानों ने जिला प्रशासन और कृषि विभाग के अधिकारियों से मांग की है कि प्रभावित गांवों में जल्द टीम भेजकर फसलों के नुकसान का सर्वे कराया जाए। उनका कहना है कि समय रहते नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा और सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि किसान दोबारा खेती शुरू कर सकें।
फसल बीमा वाले किसान दर्ज कराएं शिकायत
पंचायत सहायक अधिकारी कृषि नीरज कुमार साहू ने बताया कि जिन किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपनी फसल का बीमा कराया है, वे फसल नुकसान की शिकायत दर्ज कराएं। उन्होंने कहा कि बीमा से संबंधित प्रक्रिया के तहत किसानों को आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए।
लगातार बारिश के कारण क्षेत्र में कृषि फसलों को हुए नुकसान ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब किसानों की नजर प्रशासन की ओर है कि नुकसान का सर्वे कराकर उन्हें राहत कब तक उपलब्ध कराई जाती है।
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