आदिवासी सुनील त्रिपाठी/ समाज जागरण
चोपन/ सोनभद्र। जनपद के चोपन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में नसबंदी शिविर के दौरान स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की बदहाली सामने आई है। नसबंदी ऑपरेशन के लिए आई लगभग 200 महिलाओं को ठंड में बेड और अन्य आवश्यक सुविधाएं नहीं मिलीं, जिससे उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। यह शिविर स्वास्थ्य विभाग द्वारा लक्ष्य पूरा करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था, जिसमें चोपन और कोन ब्लॉक से बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंची थीं। 30 बेड की क्षमता वाले इस सीएचसी में ऑपरेशन के बाद महिलाओं को आराम करने के लिए बेड उपलब्ध नहीं हो सके। ऑपरेशन से पहले महिलाओं को कड़ाके की ठंड में जमीन पर ही बैठना पड़ा। कई महिलाओं के साथ छोटे बच्चे भी थे, जो ठंड से परेशान दिखे। मरीजों के परिजनों ने अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्थाओं को लेकर शिकायत दर्ज कराई है। अस्पताल में शौचालय की स्थिति भी बेहद खराब है। शौचालयों में दरवाजे तक नहीं हैं, जिसके कारण मरीजों और उनके तीमारदारों को शौच और बाथरूम के लिए अन्य स्थानों पर भटकना पड़ा। अस्पताल स्टाफ ने इस स्थिति के लिए अचानक भीड़ बढ़ने को जिम्मेदार ठहराया। स्टाफ के अनुसार, पल्स पोलियो अभियान और अन्य अभियानों में आशा कार्यकर्ताओं की ड्यूटी लगने के कारण पिछले 3-4 बार से नसबंदी ऑपरेशन अभियान नहीं चल सका था, जिससे इस बार अधिक भीड़ देखने को मिली। महिलाओं को जमीन पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। बाथरूम और शौच जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में उन्हें भटकना पड़ा। कुरछा क्षेत्र से आये राजेश ने बताया कि सुबह 8 बजे से आने के बावजूद उन्हें रजिस्ट्रेशन फॉर्म भी कई बार मांगने पर नहीं मिला।
कोटा से आईं फूलकुमारी ने बताया कि वह सुबह 8 बजे से अपनी मरीज के साथ जमीन पर बैठी ऑपरेशन के नंबर का इंतजार कर रही हैं। कुरछा क्षेत्र से आए राजेश अग्रहरि ने भी सुविधाओं की कमी पर नाराजगी जताई और कहा कि वे भी सुबह 8 बजे से अस्पताल में हैं और इधर-उधर भटक रहे हैं। अस्पताल में भारी भीड़ देखी गई, जबकि केवल 100 लोगों के लिए फॉर्म उपलब्ध थे। परिजनों ने आशंका जताई कि इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं का ऑपरेशन एक दिन में होना मुश्किल है। आशा कार्यकर्ताओं द्वारा नसबंदी ऑपरेशन की सूचना दिए जाने के बाद बड़ी संख्या में लोग विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे थे, जिससे अव्यवस्था और बढ़ गई। मरीजों और उनके साथ आए लोगों ने अस्पताल प्रशासन से बेहतर व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने की मांग की। उनका कहना था कि दूरदराज से ठंड में आईं महिलाओं को कम से कम आवश्यक सुविधाएं तो मिलनी ही चाहिए। यह पहली बार नहीं है जब चोपन सीएचसी में इस तरह की अनियमितताएं सामने आई हैं। पूर्व में भी कई बार लापरवाही उजागर हुई है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा न तो इस पर विचार किया जाता है और न ही कोई उचित कार्रवाई की जाती है। देखना होगा कि इस बार प्रशासन दोषियों के खिलाफ क्या कदम उठाता है।



