समाज जागरण अनिल कुमार
हरहुआ वाराणसी ।
भारत-चीन युद्ध-1962 मे शहीद स्व0 तिलकधारी यादव के 63वें शहीद दिवस को स्मरण करने के लिए आज 21 नवम्बर शुक्रवार को चक्का गांव के शहीद स्मारक पर पूर्व सैनिकों व क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिकों ने उन्हें माल्यार्पण करके श्रध्दांजलि अर्पित कर नमन किया।
अध्यक्ष ,पूर्वांचल वीर सेना सूबेदार मेजर सुरेश नागर ने कहा कि शहीद की वीरता और बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

सेना के रिटायर्ड हवलदार लल्लन प्रसाद चौबे जो उनके सहपाठी रहे उन्होंने उनके वीरता के बारे में जानकारी दी।
सूबेदार मेजर राजबली पाल ने 1962 के युद्ध मे माइनस तापमान में सेना के अदम्य साहस का जिक्र किया।
सूबेदार मेजर गुलाब चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि रेजांगला युद्ध मे भारत के 120 बहादुर सैनिकों की टुकड़ी जिसका नेतृत्व मेजर शैतान सिंह कर रहे थे उन्होंने चीन के 3000 सैनिकों के साथ भीषण युद्ध किया और उनके अधिकांश सैनिको को मार गिराया साजो सामान को भारी नुकसान पहुचाया था।
कमांडर सतीश यादव ने कहा भारत की सेना के अदम्य साहस से दुश्मन आगे बढ़ने में विफल रहे। रेजांगला युद्ध मे हमारे 114 सैनिक शहीद हुए जिसमे से एक स्व. शहीद तिलकधारी यादव रहे।
शहीद स्मारक चबूतरे पर उपस्थित सभी ने शहीद तिलकधारी यादव को माल्यार्पण व पुष्प अर्पित कर दो मिनट मौन रखकर श्रध्दांजलि अर्पित की।
स्व0 तिलकधारी के एकमात्र पुत्र राजनाथ यादव को उपस्थित सभी पूर्व सैनिकों ने मिलकर अंगवस्त्र ,स्मृति चिन्ह देकर समान्नित किया।
ग्राम प्रधान चक्का व महामंत्री जिला प्रधान संघ मधुवन यादव ने कार्यक्रम में आये सभी पूर्व सैनिकों का अंगवस्त्र व माल्यार्पण कर सम्मान करते हुए कहा कि सैनिक कभी मरता नहीं बल्कि वह देशभक्ति में तपकर अमर हो जाता है।
शहीद दिवस पर प्रमुख रूप से रिटायर्ड गुलाब यादव,राजबली पाल, विनोद यादव,तेज यादव,प्रवीण पाल, अमरनाथ पाल ,नन्दलाल यादव, शम्भू यादव,रामअवध यादव सहित क्षेत्रीय सम्भ्रांतजन,युवा,छात्र व सैनिक परिवार के लोग शामिल रहे।



