विधायकों और विधान पार्षदों ने शिक्षाकर्मियों के हक में बढ़ाई आवाज फैक्टनेब के हस्ताक्षर अभियान में लिया भाग
वेतन संरचना निर्धारण, अनुदान राशि भुगतान और बढ़ती महंगाई के मद्देनजर राशि वृद्धि की मांग को लेकर फैक्टनेब का संघर्ष जारी
पटना ।
बिहार राज्य संबद्ध डिग्री महाविद्यालय शिक्षक शिक्षकेतर कर्मचारी महासंघ (फैक्टनेब) के आह्वान पर चलाए जा रहे हस्ताक्षर अभियान में बिहार विधानसभा और विधान परिषद के प्रमुख जनप्रतिनिधियों ने अपनी सक्रिय भागीदारी से शिक्षाकर्मियों के पक्ष में समर्थन व्यक्त किया है। फैक्टनेब ने संबद्ध डिग्री महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षाकर्मियों के लिए परीक्षा परिणाम आधारित अनुदान के बदले वेतन- संरचना निर्धारित करने और प्रतिमाह वेतन भुगतान की मांग की है। इस महत्वपूर्ण पहल को बिहार के जनप्रतिनिधियों का भी समर्थन मिल रहा है, जो इस संघर्ष को और भी मजबूत बना रहा है।
इस हस्ताक्षर अभियान में कोसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के विधान पार्षद डॉ. संजीव कुमार सिंह, तेघड़ा विधानसभा क्षेत्र के विधायक राम रतन सिंह, विधान पार्षद जीवन कुमार, कार्तिक कुमार, श्रीमती मुन्नी देवी, डॉ. प्रमोद कुमार, राजवंशी महतो सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने अपने हस्ताक्षर कर शिक्षाकर्मियों की वेतन संरचना निर्धारण की मांग का समर्थन किया। ये जनप्रतिनिधि फैक्टनेब के संघर्ष के साथ खड़े होकर शिक्षाकर्मियों को उनका हक दिलाने के लिए तत्पर दिखे।
फैक्टनेब के मीडिया प्रभारी प्रो. अरुण गौतम के नेतृत्व में आयोजित इस अभियान में डॉ. रविंद्र कुमार सिंह, डॉ. रामनरेश प्रसाद, प्रो. श्रवण कुमार, डॉ. सुमंत कुमार सिन्हा, डॉ. मणिन्द्र कुमार, डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह और डॉ. प्रमोद कुमार जैसे प्रमुख शैक्षिक नेता भी उपस्थित रहे।
प्रमुख मांगें और संघर्ष
फैक्टनेब की प्रमुख मांगों में वेतन- संरचना का निर्धारण, प्रतिमाह वेतन भुगतान, लंबित अनुदान राशि का भुगतान, और 2008 में निर्धारित राशि में वृद्धि के साथ-साथ महंगाई को ध्यान में रखते हुए प्रति छात्र राशि में बढ़ोतरी शामिल है। फैक्टनेब का कहना है कि 2008 में निर्धारित राशि और अनुदान के आधार पर किए जा रहे भुगतान में वर्तमान महंगाई के हिसाब से संशोधन आवश्यक है। इसके साथ ही, फैक्टनेब ने 2008 के संकल्प का पालन करते हुए परीक्षा परिणाम आधारित वेतनमद सहायक अनुदान राशि की अधिकतम सीमा को समाप्त करने की भी मांग की है।
फैक्टनेब पिछले चार दशकों से शिक्षाकर्मियों के अधिकारों की रक्षा और उनके हक के लिए संघर्ष कर रहा है, और इस हस्ताक्षर अभियान के जरिए उन्होंने अपनी मांगों को और अधिक प्रभावशाली बनाने की कोशिश की है। जनप्रतिनिधियों का समर्थन प्राप्त होने से यह संघर्ष अब और भी व्यापक रूप ले चुका है और सरकार पर दबाव बढ़ गया है कि वह शिक्षाकर्मियों की लंबित मांगों को शीघ्र समाधान करे।
इस अभियान से यह स्पष्ट हो गया है कि फैक्टनेब का संघर्ष केवल शिक्षाकर्मियों के वेतन से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह उनके सम्मान, उनके हक और उनके समग्र कल्याण से जुड़ा हुआ है। अब यह देखना होगा कि बिहार सरकार इन लंबित मांगों को कब तक लागू करती है और फैक्टनेब के चार दशकों के संघर्ष का क्या परिणाम निकलता है।
जनप्रतिनिधियों का यह समर्थन यह संदेश देता है कि यह संघर्ष सिर्फ एक संगठन का नहीं, बल्कि समूचे बिहार के शिक्षाकर्मियों का है, और उनकी आवाज को हर स्तर पर सुना जाएगा।
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