चंगेरा धनगवां-चुनहागढ़ी में ‘काले सोने’ का खूनी खेल; चंगेरा में गेमन और धनगवां में भूरा का आतंक

समाज जागरण
बुढ़ार। शहडोल जिले का बुढ़ार थाना क्षेत्र इन दिनों अवैध कोयला माफियाओं की चरागाह बन चुका है। एक तरफ भारत आदिवासी पार्टी ने पत्र लिखकर चंगेरा में हो रहे अवैध उत्खनन की पोल खोली है, तो दूसरी तरफ धनगवां चुनहागढ़ी में दागी अपराधी भूरा का खूनी साम्राज्य फल-फूल रहा है।
लेटर पैड की शिकायत

भारत आदिवासी पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष अंकिता सिंह परस्ते द्वारा थाना प्रभारी बुढ़ार को सौंपे गए शिकायती पत्र (दिनांक 05/03/2026) ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। पत्र के अनुसार माफिया गेमन की दबंगई के कारण चंगेरा गाँव की जमीन अंदर से पूरी तरह खोखली हो चुकी है खुलेआम हो रही कोयला चोरी के कारण शासन को करोड़ों की ‘बेशकीमती’ क्षति हो रही है। अवैध उत्खनन के कारण बने गड्ढों में गिरकर आए दिन जानवर मर रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।शिकायत में स्पष्ट लिखा है कि माफियाओं में पुलिस प्रशासन या खनिज विभाग का कोई डर नहीं है।धनगवां और चुनहागढ़ी का इलाका खौफ का पर्याय बन चुके भूरा के कब्जे में है।


मौत का इतिहास
क्षेत्र की जनता आज भी उस त्रासदी को नहीं भूली है, जब चुनहागढ़ी में अवैध उत्खनन के दौरान एक दंपत्ति परिवार मलबे में दबकर मौत की आगोश में समा गया था।
दागी रिकॉर्ड
भूरा पर पहले से ही कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, लेकिन पुलिस उसे गिरफ्तार करने के बजाय कथित तौर पर उसके अवैध कोयला उत्खनन का हिस्सा बन रही है।


रोजाना दर्जनों ट्रैक्टर से हो रहा उत्खनन
पत्र में उल्लेख है कि सुबह से रात तक दर्जनों ट्रैक्टर अवैध कोयला भरकर बाहर ले जाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की पेट्रोलिंग गाड़ियां इन रास्तों से गुजरती हैं, लेकिन ‘माफिया-पुलिस गठबंधन’ के कारण इन ट्रैक्टर पर कभी कार्रवाई नहीं होती।


प्रशासन से सीधे सवाल
जब भारत आदिवासी पार्टी ने लिखित शिकायत दे दी है, तो अब तक माफिया गेमन और उसके ट्रैक्टरों को क्यों नहीं पकड़ा जाय
क्या शहडोल प्रशासन किसी और बड़ी जनहानि का इंतजार कर रहा है?
“शिकायती पत्र की स्याही सूखने से पहले अगर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह माना जाएगा कि बुढ़ार पुलिस जनता की सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि माफियाओं की तिजोरी भरने के लिए तैनात है।

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