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अट्ठारह सौ साल पहले से जारी है काशी की बसाहट

समाज जागरण वाराणसी मंडल ब्यूरो पंकज झा वसंत कन्या महाविद्यालय में चल रही ‘काशी की धरोहरों के पुरातात्विक अध्ययन’ विषयक कार्यशाला के दूसरे दिन सारनाथ और निकट के सहायक सन्निवेशों की प्रकृति और ऐतिहासिकता पर बोलते हुए प्रोफेसर विदुला जायसवाल ने उपरोक्त विचार रखे। उन्होंने काशी, वाराणसी और बनारस जैसे नामों की समीक्षात्मक व्याख्या प्रस्तुत की और इस नगरी में संस्कृति के सातत्य को इसका विशिष्ट व्यक्तित्त्व बताया। प्रतिभागियों के प्रश्नों ने कार्यशाला को रोचक और ज्ञानवर्धक बनाया। प्राचार्या प्रोफेसर रचना श्रीवास्तव के संरक्षण में आयोजित कार्यशाला में प्राचीन भारतीय इतिहास विभाग के प्राध्यापकों की उपस्थिति रही।


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