समाज जागरण/ विजय कुमार अग्रहरी
सोनभद्र। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गौ सेवा को सुशासन का आधार मानते हुए निराश्रित गोवंश के संरक्षण के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है। सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से न केवल गोवंश को सुरक्षित आश्रय मिल रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।
उपाध्यक्ष गो- सेवा आयोग उ.प्र. महेश कुमार शुक्ल ने बताया प्रदेश में वर्तमान समय में 7,700 से अधिक गौ-आश्रय स्थल संचालित हैं, जिनमें 16 लाख से ज्यादा निराश्रित गोवंश को संरक्षित किया जा रहा है। इन आश्रय स्थलों पर गोवंश के लिए भोजन, स्वच्छ पेयजल और चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं। साथ ही सरकार द्वारा प्रति गोवंश 50 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भरण-पोषण की धनराशि डीबीटी के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है। गौशालाओं के संचालन में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए 5,446 से अधिक स्थलों पर 7,592 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जो 24 घंटे निगरानी करते हैं।
इसके अलावा “मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना” के तहत अब तक 1,67,065 गोवंश को गोपालकों को सौंपा गया है, जिससे लोगों की भागीदारी भी बढ़ी है और उनकी आय में भी वृद्धि हुई है। जनपद सोनभद्र में भी गौ संरक्षण को लेकर उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है। यहां 8 गौ-आश्रय स्थलों में 2,814 गोवंश संरक्षित हैं, जबकि 368 गोपालकों ने 1,057 गोवंश को अपनाकर योजना को सफल बनाने में योगदान दिया है। सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम 1955 के तहत गोवंश संरक्षण के लिए सख्त प्रावधान लागू किए गए हैं। अधिकारियों को नियमित निरीक्षण और लापरवाही पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे गोवंश को सड़कों पर न छोड़ें और कूड़ा-कचरा खुले में न फेंकें, जिससे गोवंश के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। सरकार का उद्देश्य गौ सेवा के माध्यम से सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संतुलन को मजबूत करना है।



