शहडोल । संभागीय मुख्यालय के पास इलाका पटेल नगर वार्ड नंबर 16 ‘बड़ी भीट’ (खसरा नंबर 39/1 व 39/2) इन दिनों भू-माफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों के लिए मलाईदार चारागाह बन चुका है। रसूखदार कॉलोनाइजरों ने कलेक्ट्रेट से लेकर राजस्व महकमे की नाक के नीचे कॉलोनाइजर एक्ट की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। यहाँ ‘मोटे मैनेजमेंट’ का ऐसा खेल चल रहा है कि कृषि भूमि का सीना चीरकर धड़ल्ले से बिना वैध ले-आउट और डायवर्शन के प्लॉट बेचे जा रहे हैं और पूरा प्रशासनिक अमला रहस्यमयी चुप्पी साधे बैठा है।
एक ही खसरे के आधा दर्जन टुकड़े, कागजों पर जादूगरी
इस संगठित अपराध का सबसे ताजा प्रमाण बड़ी भीठ के खसरा नंबर 39/2 में देखने को मिला है, जहां अब तक आधा दर्जन से अधिक बटांक (टुकड़े) किए जा चुके हैं। जमीन का एक छोटा सा हिस्सा कागजों पर डायवर्ट दिखाकर, उसके पीछे की पूरी कृषि भूमि पर अवैध रूप से आवासीय प्लॉटिंग कर दी गई।
नियमों के मुताबिक बिना नगर तथा ग्राम निवेश (T&CP) और नगर पालिका की अनुमति के ऐसी प्लॉटिंग अपराध है, लेकिन यहाँ पटवारी की जादुई रिपोर्ट, आरआई (RI) की नापजोख और रजिस्ट्रार कार्यालय की चमत्कारी कलम ने मिलकर नियमों को पूरी तरह दफन कर दिया और बिना वैध ले-आउट के रजिस्ट्रियां भी होने लगीं।
पिछली नोटिसें हुईं ठंडे बस्ते में ‘मैनेज’
यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी जब मामले उछले, तो जिला प्रशासन ने केवल खानापूर्ति करने और अपनी पीठ थपथपाने के लिए नोटिस जारी किए थे। लेकिन सुलगता सवाल यह है कि उन नोटिसों का हश्र क्या हुआ? क्या वे फाइलें भी किसी रैक के नीचे ‘मैनेज’ हो गईं? जब तक अवैध कॉलोनी काटने वाले भू-स्वामियों और आंखें मूंदकर रजिस्ट्री करने वाले रजिस्ट्रार पर सीधे एफआईआर नहीं होगी, तब तक शहडोल की धरती को ये जमीनी डकैत ऐसे ही नोचते रहेंगे।
मूलभूत सुविधाओं को तरसेंगे मासूम खरीदार
भू-माफियाओं और राजस्व विभाग की इस जुगलबंदी का सबसे खौफनाक अंजाम उन मासूम खरीदारों को भुगतना पड़ेगा, जो अपनी गाढ़ी कमाई का एक-एक पैसा जोड़कर यहाँ आशियाने का सपना देख रहे हैं। नगर पालिका क्षेत्र के भीतर बिना किसी टाउनशिप प्लानिंग के काटी जा रही इस अवैध कॉलोनी में आने वाले दिनों में भयंकर विवाद होना तय है।
न सड़क मिलेगी, न बिजली का खंभा और न पानी की पाइपलाइन, क्योंकि यह कॉलोनी सरकारी वैध नक्शे पर है ही नहीं।
नालियों और रास्तों को लेकर आने वाले समय में यहाँ खूनी संघर्ष की स्थिति बनेगी।
सबसे बड़ा आश्चर्य यह है कि जब भी प्रशासन की कुंभकर्णी नींद टूटेगी और बुलडोजर चलेगा, तो गाज उन गरीब खरीदारों पर गिरेगी जिन्होंने रजिस्ट्री के वक्त शासन को ईमानदारी से स्टांप ड्यूटी दी थी। असली गुनाहगार भू-स्वामी और माफिया तब तक अपनी जेबें भरकर रफूचक्कर हो चुके होंगे।
कलेक्टर के हंटर का इंतजार!
अब देखना यह है कि शहडोल का जिला प्रशासन इस बड़ी भीठ के खेल पर कोई कड़ा हंटर चलाता है या फिर भू-माफियाओं के इस तगड़े ‘मैनेजमेंट’ के आगे घुटने टेक देता है। क्या भ्रष्ट पटवारी, आरआई और रजिस्ट्रार की तिगड़ी पर एफआईआर (FIR) होगी, या फिर अवैध रजिस्ट्रियों का यह काला कारोबार यूं ही बदस्तूर जारी रहेगा?



