समाज जागरण अनिल कुमार
हरहुआ वाराणसी मुंशी प्रेमचन्द की कहानियों में कथावस्तु की विविधता पर दृष्टिपात करते हुए समाज की सच्चाइयां और बुराइयों को उभारा गया है। जिसमें मुंशी जी लिखते है कि कहानी के पात्र के व्यक्तिव का यथार्थ है। साहित्य उन रचनाओं को कहेंगे जिसमें कोई सच्चाई प्रकट की गई हो। उक्तकथन प्रो. श्रद्धानंद ने संस्कृति विभाग उ प्र व जिला प्रशासन वाराणसी की प्रेरणा से प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र ट्रस्ट लमही वाराणसी, द्वारा प्रेमचंद स्मारक स्थल लमही में आयोजित सुनों मैं प्रेमचंद कहानी पाठ 1497 दिवस पूर्ण होने पर कहा। प्रेमचंद की कहानी विषय समस्या का पाठन वाराणसी की सुप्रसिद्ध साहित्यकार व पी आई बी के सेवा निवृत्त निदेशक सूर्य कांत त्रिपाठी ने किया। जिनका सम्मान ट्रस्ट के संरक्षक प्रो. श्रद्धानंद , डाक्टर राम सुधार सिंह व निदेशक राजीव गोंड एवं आलोक शिवाजी ने किया। साथ ही डाक्टर राम सुधार सिंह ने कहा कि प्रेमचन्द एक महान् यथार्थवादी लेखक थे। यथार्थ उनके लिए एक अविभाज्य वस्तु भी, जिसमें व्यक्ति और समाज तथा परिवेश और मन का जैसा अलगाव न था जैसा प्रायः मान लिया जाता है। इस अवसर आलोक शिवाजी, पुष्पा शिवाजी, मनोहर, रोहित गुप्ता, शक्ति सिंह, संजय श्रीवास्तव, राहुल यादव, देव बाबू, रौशन सिंह,आदि ने कहानी सुनी। संचालन आयुषी दूबे व सभी का स्वागत मनोज विश्वकर्मा ने किया।
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