नारी शक्ति की दृढ़ता, आस्था और त्याग का प्रतीक है वट सावित्री व्रत

26 मई को सुख समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना करेंगी व्रती महिलाएं

दैनिक समाज जागरण

दुद्धी/ सोनभद्र। दुद्धी तहसील क्षेत्र व आसपास के क्षेत्रों में आगामी 26 मई को वट सावित्री व्रत विधि-विधान पूर्वक किया जाएगा. यह व्रत विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की दीर्घायु, सुख समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए किया जाता है. यह व्रत नारी शक्ति की दृढ़ता, आस्था और त्याग का प्रतीक माना जाता है. वट सावित्री व्रत की कथा महाभारत के वन पर्व में वर्णित है. इसके अनुसार सावित्री नामक पतिव्रता स्त्री ने अपने तप, बुद्धिमत्ता और अडिग निष्ठा से यमराज से अपने मृत पति सत्यवान का जीवन पुनः प्राप्त किया था। सावित्री ने वटवृक्ष के नीचे बैठकर कठोर तप किया था, इसलिए इस व्रत में वट (बरगद) वृक्ष की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वटवृक्ष की पूजा करने से पति की दीर्घायु और संतान सुख की प्राप्ति होती है यह व्रत विधि पूर्वक किया जाता है, जिससे साधक को भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश का आशीर्वाद प्राप्त होता है. वैवाहिक संबंधों में मिठास और पति-पत्नी के बीच प्रेम संबंध बने रहे इसके लिए कम से कम 11 विवाहित महिलाओं द्वारा सुहाग का सामान उपहार स्वरूप देना अत्यंत फलदाई माना गया है. पंचांग के अनुसार इस वर्ष अमावस्या तिथि की शुरुआत 26 मई सोमवार को दोपहर 12:11 बजे से होगी और इसका समापन 27 मई को सुबह 8:31 बजे होगा. क्योंकि अमावस्या तिथि का प्रभाव दिन में रहेगा, इसलिए वट सावित्री व्रत 26 मई को रखा जाएगा।

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