समाज जागरण मनोज कुमारसाह
गोड्डा
मेहरमा प्रखंड मुख्यालय सहित क्षेत्र के विभिन्न गांवों में मकर संक्रांति की धूम मची है। इसे लेकर गांव से बाजार तक में चहल-पहल बढ़ गई है तिलकुल, चूड़ा, गुड व अन्य सामग्री की दुकानें सजी है। जहां खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है। तिल की सोंधी खुशबू से गांव और बाजार महक उठा है। स्थानीय बाजार पिरोजपुर, बाराहाट, प्रफुल्लो हाट के अलावा डोय, घोरीचक, सुरनी, मैनाचक,कसबा,खानीचक, बलबड्डा आदि चौक चौराहों पर भी तिल कतरी,चुड़ा,गुड़ सहित इससे बने सामग्री की दुकान सजी है। इससे गांव से लेकर बाजार तक की रौनक बढ़ गई है।परंपरा के अनुसार बीते करीब एक सप्ताह पूर्व से ही लोग इन सामग्रियों को खरीद कर अपने सगे, संबंधियों, रिश्तेदारों के यहां पहुंचा रहे हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन से सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर उगने लगते हैं।इसलिए इसे मकर संक्रांति कहा जाता है। साथ हीं लोग इस दिन उत्सव मनाते हैं। ठंड में तिल का सेवन स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक माना गया है।
इसीलिए लोग खासकर मकर संक्रांति उत्सव के दौरान दही, चूड़ा,गुड़ के साथ तिल के बने लड्डू, चिक्की, तिलकतरी या तिलकुट का सेवन करते हैं। विज्ञान भी इस मौसम में तिल के प्रयोग को स्वास्थ्य के लिए लाभकारी बताता है। तिल सेवन की वजह से इसे तिल संक्रांति भी कहा जाता है। ऐसे में तिल के बने विभिन्न पकवानों की बिक्री हेतु दूर दराज के दुकानदार भी स्थानीय बाजारों में दुकान लगाए हैं। खासकर गया का तिलकुट काफी प्रसिद्ध है। जो चीनी एवं गुड़ दोनों से बनाया जाता है। मकर संक्रांति के अवसर पर कहीं-कहीं खिचड़ी का भोग लगाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करने का भी प्रचलन है। इस कारण इसे खिचड़ी पर्व के रूप में भी जाना जाता है। माना जाता है कि इस दिन श्रीहरि विष्णु के रूप मधुसूदन भगवान को खिचड़ी का भोग लगाने से देवी लक्ष्मी के साथ ही साथ वह प्रसन्न होते हैं और सारी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। इसीलिए इस दिन पूरे नेम निष्ठा एवं संयम के साथ खिचड़ी बनाई जाती है।



