समाज जागरण मनोज कुमारसाह
गोड्डा
महागामा प्रखंड मुख्यालय सहित सहितमेहरमा प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न गांवों में सोमवार को पति की लंबी आयु की कामना को लेकर वट सावित्री की पूजा पारंपरिक रीति रिवाज के साथ हरसोलाशपूर्ण वातावरण में किया गया। इस दौरान मेहरमा सहित क्षेत्र के कसबा,मैनाचक, पिरोजपुर, बलबड्डा, सिंघाड़ी,बाजितपुर, बुधासन, सुरनी,डोय, घोरीचक आदि गांव की महिलाएं सोलह सिंगार कर तथा उपवास में रहकर विभिन्न प्रकार के फल, फूल व पूजा सामग्री से सजी डलिया के साथ अपने-अपने गांव में स्थित वटवृक्ष (बरगद) का पूजन और सावित्री-सत्यवान की कथा का श्रवण किया। इस दौरान सुहागिनों ने एक दूसरे के मांग में सिंदूर भरकर अखंड सौभाग्यवती रहने की कामना की। महिलाएं अपने पति और बड़ों का पांव धोकर और छूकर आशीर्वाद भी लिया। सुबह से शाम तक पूजा होता रहा। इससे पूरे प्रखंड क्षेत्र का माहौल भक्ति और उत्साह में सराबोर रहा। आर्य समाज के वैदिक पुरोहित विद्या निधि आर्य ने बताया कि वेद के अनुसार वट पूजा को वर पूजा भी कहा जाता है। इसमें पति और पत्नी दोनों को एक दूसरे का सम्मान करना बताया गया है। पत्नी को पति तथा पति को पत्नी के लिए पूजनीय होना भी अनिवार्य बताया गया है। घर में सुख, अमन, चैन और शांति लाने में तथा घर को स्वर्ग बनाने में पत्नी की अहम भूमिका रहती है। पति घर की जिम्मेदारी उठाते हैं। हर आवश्यकता की की पूर्ति करते हैं। दोनों को नियमानुसार अपने-अपने धर्म का पालन करना चाहिए। यही वर पूजा की विशेषता है। पुरान में भी यह स्पष्ट किया गया है। कि वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों का वास है। इस वर्त को करने से पति की उम्र लंबी होती है।तथा उनकी अकाल मृत्यु टल जाती है।
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