स्कूल और कॉलेजों के 500 मीटर दायरे को ‘ड्रग फ्री जोन’ बनाने का फैसला नशे के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है, लेकिन असली सवाल इसके जमीनी क्रियान्वयन और निगरानी का है। नशे का कारोबार केवल स्कूल-कॉलेज की चारदीवारी तक सीमित नहीं है। शहरों के मोहल्लों, गांवों, कस्बों और बाजारों में भी बच्चों और युवाओं का रोजाना ऐसे स्थानों से गुजरना होता है, जहां नशीले पदार्थ या तंबाकू उत्पाद आसानी से उपलब्ध होने की शिकायतें सामने आती हैं।
नोएडा के सोम बाजार जैसे व्यस्त बाजारों में रोजाना हजारों लोगों की आवाजाही होती है। यहां महिलाएं, बच्चे और परिवार खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। ऐसे व्यस्त सार्वजनिक स्थानों के आसपास शराब की दुकानों की मौजूदगी को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। सेक्टर-41 के अक्कापुर क्षेत्र में मोहल्ले के प्रवेश मार्ग के पास शराब की दुकान होने को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। ऐसे मामलों में प्रशासन को यह देखना चाहिए कि लाइसेंस और नियमों के साथ-साथ स्थानीय आबादी, सार्वजनिक आवागमन और संवेदनशील स्थानों के संबंध में निर्धारित प्रावधानों का पालन हो रहा है या नहीं।
सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि स्कूल से दुकान की दूरी कितनी है। सवाल यह भी है कि जिस रास्ते से बच्चा स्कूल जाता है, जिस बाजार से परिवार गुजरता है और जिस मोहल्ले के प्रवेश द्वार से रोजाना हजारों लोग आते-जाते हैं, वहां नशे की उपलब्धता और उसके प्रभाव को कैसे रोका जाएगा?
इसी तरह कई क्षेत्रों में किराना और राशन की दुकानों पर गुटखा, सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों की बिक्री की शिकायतें आम हैं। यदि नशे के खिलाफ सरकार वास्तव में प्रभावी अभियान चलाना चाहती है तो केवल स्कूल-कॉलेज के आसपास 500 मीटर की सीमा तय करना पर्याप्त नहीं होगा। मोहल्लों, बाजारों, गांवों और कस्बों में भी नियमित जांच, नियमों का पालन और अवैध बिक्री पर कार्रवाई जरूरी है।
बच्चों को नशे से बचाने की जिम्मेदारी केवल परिवार और स्कूल की नहीं, बल्कि प्रशासन, स्थानीय निकाय, पुलिस, कारोबारियों और पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। ‘ड्रग फ्री जोन’ की सफलता इस बात से तय होगी कि यह सिर्फ कागज पर बनी सीमा रहती है या उसके बाहर भी नशे के स्रोत और बिक्री नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई होती है।
समाज जागरण का सवाल सीधा है—स्कूल के आसपास 500 मीटर तक निगरानी होगी, तो स्कूल तक पहुंचने वाले रास्तों, मोहल्लों के प्रवेश द्वारों, बाजारों और गांव-कस्बों में बच्चों के सामने मौजूद नशे के स्रोतों की निगरानी कौन करेगा?
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