दैनिक समाज जागरण 06.04.2026 चांद कुमार लायेक (ब्यूरो चीफ) पूर्वी सिंहभूम जमशेदपुर
जमशेदपुर: शहर में ट्रांसजेंडर समुदाय से जुड़े एक अहम मुद्दे ने जोर पकड़ लिया है। “उत्थान सीबीओ – थर्ड जेंडर राइट्स” संस्था की ओर से वर्ष 2026 में प्रस्तावित ट्रांसजेंडर बिल का विरोध करते हुए जिला प्रशासन को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया है। संस्था के सदस्यों ने इस प्रस्तावित बिल को ट्रांसजेंडर समुदाय के हितों के खिलाफ बताते हुए इसे लागू नहीं करने की मांग की है।
यह ज्ञापन पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) के जिला उपायुक्त के नाम संबोधित किया गया है। संस्था के फाउंडर एवं सेक्रेटरी अमरजीत सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों ने अपनी चिंताओं को प्रशासन के समक्ष रखा। ज्ञापन में कहा गया है कि प्रस्तावित ट्रांसजेंडर बिल 2026 समुदाय की वास्तविक जरूरतों, अधिकारों और सम्मानजनक जीवन की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है।
संस्था के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह बिल ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए नई समस्याएं खड़ी कर सकता है। उनका आरोप है कि इस प्रस्ताव में ऐसे कई प्रावधान शामिल हैं, जो न केवल अव्यवहारिक हैं, बल्कि समुदाय की स्वतंत्र पहचान के अधिकार को भी प्रभावित करते हैं। उनका कहना है कि यह बिल ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को फिर से सरकारी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर निर्भर बना सकता है, जिससे उनकी आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान को ठेस पहुंचेगी।
ज्ञापन में वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए ऐतिहासिक ‘नालसा जजमेंट’ का विशेष उल्लेख किया गया है। संस्था का कहना है कि उस फैसले में ट्रांसजेंडर समुदाय को “तृतीय लिंग” के रूप में मान्यता दी गई थी और उन्हें अपनी पहचान स्वयं तय करने का अधिकार प्रदान किया गया था। इसके साथ ही, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक अवसरों में समान भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में यह फैसला मील का पत्थर साबित हुआ था।
लेकिन संस्था का आरोप है कि प्रस्तावित ट्रांसजेंडर बिल 2026 इस ऐतिहासिक फैसले की मूल भावना के विपरीत है। उनका कहना है कि नए बिल में ऐसे प्रावधान शामिल हैं, जो ट्रांसजेंडर समुदाय के आत्मनिर्णय के अधिकार को सीमित करते हैं। इससे समुदाय के लोगों को अपनी पहचान साबित करने के लिए फिर से जटिल प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ सकता है।
उत्थान सीबीओ के प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि बिल के कई प्रावधान व्यवहारिक रूप से लागू करना कठिन है। इससे जमीनी स्तर पर समस्याएं बढ़ेंगी और ट्रांसजेंडर समुदाय को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं। उनका मानना है कि इससे समाज में पहले से मौजूद भेदभाव और भी गहरा सकता है।
ज्ञापन के माध्यम से संस्था ने जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि इस गंभीर मुद्दे को राज्य और केंद्र सरकार तक पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि यदि इस बिल को बिना किसी संशोधन के लागू किया गया, तो यह ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों पर नकारात्मक प्रभाव डालेगा और उनकी सामाजिक स्थिति को और कमजोर करेगा।
संस्था ने यह भी मांग की है कि किसी भी नए कानून को लागू करने से पहले ट्रांसजेंडर समुदाय के प्रतिनिधियों से व्यापक स्तर पर परामर्श किया जाए। उनका कहना है कि जब तक समुदाय की वास्तविक समस्याओं और जरूरतों को समझा नहीं जाएगा, तब तक कोई भी कानून प्रभावी और न्यायसंगत नहीं हो सकता।
अंत में, उत्थान सीबीओ ने जिला प्रशासन से इस मामले में त्वरित संज्ञान लेने और उचित कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की है। ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों को उम्मीद है कि उनकी आवाज को गंभीरता से सुना जाएगा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।



