दैनिक समाज जागरण 06.04.2026 चांद कुमार लायेक (ब्यूरो चीफ) पूर्वी सिंहभूम जमशेदपुर
जमशेदपुर: शहर के निजी स्कूलों में ‘री-एडमिशन’ के नाम पर अभिभावकों से कथित अवैध वसूली का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के नेता राजा कांडिली ने पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त को एक लिखित शिकायत सौंपते हुए पूरे मामले की जांच और दोषी स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि शहर के कई निजी स्कूल हर साल ‘फ्री एडमिशन’ या ‘री-एडमिशन’ के नाम पर अभिभावकों से मोटी रकम वसूलते हैं। यह प्रक्रिया पूरी तरह अनियमित और पारदर्शिता से दूर बताई जा रही है। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल प्रबंधन इस शुल्क को अनिवार्य बताकर उन्हें भुगतान के लिए मजबूर करता है, जबकि इसके लिए कोई स्पष्ट सरकारी दिशा-निर्देश नहीं है।
मामले को और गंभीर बनाते हुए शिकायत में यह भी कहा गया है कि स्कूल प्रबंधन अभिभावकों को एक पर्ची थमा देता है, जिसके आधार पर स्कूल परिसर में ही लगाए गए स्टॉल से किताबें खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है। अभिभावकों का आरोप है कि उन्हें बाजार से सस्ती कीमत पर उपलब्ध किताबें खरीदने की अनुमति नहीं दी जाती, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।
राजा कांडिली ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर कई अभिभावक उनकी पार्टी के पास शिकायत लेकर पहुंचे हैं। हालांकि, स्कूल प्रबंधन के दबाव के कारण वे खुलकर विरोध नहीं कर पाते। उन्होंने आरोप लगाया कि जो अभिभावक इस तरह की वसूली के खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश करते हैं, उनके बच्चों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। यहां तक कि कुछ मामलों में स्कूल से नाम काटने की धमकी भी दी जाती है।
उन्होंने कहा कि बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित अभिभावक मजबूरी में चुप रह जाते हैं और इस तरह की व्यवस्था को सहने के लिए विवश होते हैं। इससे न केवल अभिभावकों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े होते हैं।
शिकायत पत्र में उपायुक्त से मांग की गई है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी स्कूलों की पहचान की जाए और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही यह भी आग्रह किया गया है कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हो सकें और अभिभावकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से राहत मिले।
इस मामले के सामने आने के बाद शहर में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। सामाजिक संगठनों और अभिभावक समूहों ने भी इस मुद्दे पर प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस प्रकार की मनमानी को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
अब सबकी नजर जिला प्रशासन पर टिकी है कि वह इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाता है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह कार्रवाई न केवल दोषी स्कूलों के खिलाफ एक सख्त संदेश देगी, बल्कि अभिभावकों के अधिकारों की रक्षा के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
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