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कब पूरी होगी पहडिया जलाशय परियोजना

सिंचाई की आस में गुजरी पीढियां, ओर कितना इंतजार
दैनिक समाज जागरण

उमरिया —- उमरिया जिले के पाली विकास खंड की पहडिया जलाशय परियोजना से सिंचाई की आस में लाभांवित गाँव की एक पीढ़ी तो गुजर गयी, लेकिन प्रशासन की हीला हवाली, सरकारों की गैर जिम्मेदाराना आचरण के कारण किसानों की आशा – निराशा में बदलने लगी है।
ज्ञात होवे की पहाडिया जलाशय का काम वर्ष 1980 में राहत मद से जलाशय का काम शुरू किया गया था, जिसमें से बांध की मेड का काम लगभग पूरी हो गयी है, बांध के लिये भूमि अधिग्रहण भी कर ली गई है, किसानों को मुआवजा भुगतान कर जलाशय के लिए सुरक्षित किया जा चुका है, इस सबके बाद राजधानी के मुख्यालय स्तर पर बैठे विभागीय अधिकारियों की कुंभकरणीय निंद्रा में लीन होने के कारण परियोजना लटकी हुई है। जिला स्तरीय विभागीय अधिकारियों के लगातार प्रयास के कारण वर्ष 2016 में साध्यता प्रदेश स्तरीय विभागीय अधिकारियों व्दारा जारी किया गया था, लेकिन इन नौ वर्षों में भोपाल में बैठे आला विभागीय अधिकारियों के कारण आज तक प्रशासकीय स्वीकृति नहीं मिल पायी।
मालुम होवे की पहडिया जलाशय परियोजना के बन जाने से क्षेत्र के चार गाँव की 500 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होगी,जिससे लगभग 2000 लघु और
सीमांत किसानों को लाभ मिलेगा।
पहडिया जलाशय से भदरा, बडवाही, इटौर और बकेली गाँव के आदिवासी किसानों को इसका लाभ मिलेगा। बांध को देखने से पता चलता है कि बांध के निर्माण कार्य लगभग 95 प्रतिशत का काम पूरा हो चुका है। सिर्फ बचा है तो स्थानीय सजलीय नाला के दोनों किनारे तक बनी मेड को जोड़ने काम, जिसके लिए विभाग के उच्चाधिकारियों ने आज तक मुहुर्त नहीं निकाल पाया।
गौर तलब है कि पहडिया जलाशय के शुरू होने के बाद केन्द्र से लेकर राज्य तक की सरकारे आयी और गयी लेकिन इस क्षेत्र में अधिकतम समय भारतीय जनता पार्टी के नुमाइंदे के रूप में भारतीय जनता पार्टी के ही विधायक सुशोभित रहे जिनकी सरकार भी तकरीबन चार पंचवर्षीय से प्रदेश में सत्तारूढ़ है, और जिनके लोक लुभावना वादो के मलबे में पीढियां गुजर गयी , फिर भी देश के अन्न दाताओ की आशा मृगतृष्णा बनी हुई है। प्रदेश की किसान हितैषी सरकार अगर इस ओर ध्यान दें तो चंन्द्र रूपयों के अभाव में लटकी परियोजना की फसल से न सिर्फ चार गाँव की भूखमरी दूर होगी, इस फसल की लहलहाने से भाजपा की जडे मजबूत होकर अमर बेल की भांति पूरे जिले में लहलहा उठेगी। अपेक्षा है कि प्रशासनिक पहल के साथ जनप्रतिनिधियों का सहयोग इस परियोजना के लिए मील का पत्थर साबित होगा।


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