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गांव की गलियां और सड़कें कब होंगी अतिक्रमणमुक्त? ग्रामीणों की मनमानी और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से आवागमन प्रभावित

पंकज कुमार पाठक,समाज जागरण

पद्मा (हजारीबाग)। एक ओर गांवों को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने के लिए स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों की लापरवाही के कारण गांवों की गलियां और सड़कें अतिक्रमण का शिकार हो रही हैं। पंचायतों के विकास के लिए सरकारी स्तर पर विभिन्न योजनाओं के तहत लाखों रुपये खर्च कर पीसीसी सड़कों का निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन इन सड़कों का समुचित उपयोग सुनिश्चित नहीं हो पा रहा है।


प्रखंड के विभिन्न गांवों का जायजा लेने पर कई जगहों पर सार्वजनिक सड़कों और गलियों की बदहाल स्थिति देखने को मिलती है। सड़क किनारे घर बनाने वाले कुछ ग्रामीण अपने मवेशियों को सड़क पर ही बांध देते हैं। इतना ही नहीं, कई लोग अपनी निजी गाड़ियां, बैलगाड़ियां, कृषि उपकरण एवं अन्य घरेलू सामान भी सार्वजनिक रास्तों पर रख देते हैं। नतीजतन, गांव की संकरी गलियां अतिक्रमण की चपेट में आकर और भी संकरी हो जाती हैं। इससे पैदल चलने वालों के साथ-साथ साइकिल, मोटरसाइकिल और अन्य वाहनों से आवागमन करने वालों को भी भारी परेशानी होती है। विशेषकर स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और आपातकालीन स्थिति में मरीजों को ले जाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।


विडंबना यह है कि सरकारी राशि खर्च कर जिन सड़कों का निर्माण ग्रामीणों की सुविधा और सुगम आवागमन के लिए कराया गया है, उन्हीं सड़कों का इस्तेमाल कुछ लोग अपनी निजी संपत्ति की तरह कर रहे हैं। सार्वजनिक रास्तों पर मवेशियों को बांधना, वाहन खड़े करना और कृषि उपकरण रखना आम समस्या बनती जा रही है। इससे न केवल आवागमन बाधित होता है, बल्कि गांवों की स्वच्छता और सुंदरता पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है।


सबसे दुर्भाग्यपूर्ण पहलू यह है कि इस गंभीर समस्या के समाधान की दिशा में जनप्रतिनिधियों और संबंधित पंचायत स्तर के जिम्मेदार लोगों की अपेक्षित सक्रियता नजर नहीं आती। आखिर सार्वजनिक सड़कों को अतिक्रमणमुक्त कराने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा? सरकारी योजनाओं से सड़कें तो बन रही हैं, लेकिन उन पर निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करने की पहल कब होगी?


आवश्यकता है कि पंचायत प्रतिनिधि, ग्राम सभा और संबंधित प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए गांवों में विशेष अभियान चलाएं। सार्वजनिक सड़कों और गलियों से मवेशियों, निजी वाहनों, बैलगाड़ियों तथा कृषि उपकरणों को हटवाकर रास्तों को अतिक्रमणमुक्त कराया जाए। साथ ही, ग्रामीणों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी कि सार्वजनिक सड़कें किसी व्यक्ति की निजी जागीर नहीं, बल्कि पूरे गांव की साझा संपत्ति हैं। यदि समय रहते इस दिशा में ठोस पहल नहीं की गई तो गांवों के विकास और स्वच्छता के तमाम दावे जमीनी हकीकत से दूर ही रहेंगे।


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