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*मनमर्जी गाइड पर चाबुक, टिकटो के कालाबाजारी पर एफडी और पर्यटन प्रभारी का हंटर

दैनिक समाज जागरण

मानपुर

विश्व के नक्शे में अपनी छवि रखने वाला बांधवगढ़ नेशनल पार्क एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। दिनों दिन पार्क में पर्यटकों की संख्या काफी बढ़ी हुई नजर आ रही है, जिसको मद्देनजर रखते हुए पार्क में नियम विरुद्ध तरीके से सफारी कराने वाले मनमर्ज़ी गाइड व जंगल में जाने वाले पर्यटकों की टिकट की कालाबाजारी का व पूर्व के क्षेत्र संचालक द्वारा जारी आदेश को फाइलों में दफन कर रख देने वाले आदेश को वर्तमान क्षेत्र संचालक डॉ अनुपम सहाय ने लागू कर दिया तो उपरोक्त आदेश से मनमर्जी गाइड व टिकटों की कालाबाजारी करने वालों के बीच में हड़कंप मच गया जब वर्तमान क्षेत्र संचालक डॉक्टर अनुपम सहाय खुद ही टिकट काउंटर पर बैठकर काउंटर पर पर्यटकों को बांटने वाली टिकटों को अपने संज्ञान में लिया जिससे सर्वाधिक दूर दराज से आने वाले पर्यटकों को लाइन में काफी टिकट बटी जिससे पर्यटक काफी खुश नजर आए , ज्ञातव्य हो कि इस महत्वपूर्ण कार्य में मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्व प्रबंधन तरह तरह से पर्यटक पार्क टिकट ब्लैकमेलिंग के साथ साथ जंगल सफारी के दौरान बाघों की इर्द गिर्द वाहनों का जमावड़ा लगा कर फोटो ग्राफी कराई जाती थी जिसमें कई घटना भी पूर्व में घटित हुई जिस पर क्षेत्र संचालक डॉक्टर अनुपम सहाय के निर्देशन में वर्तमान में कार्यत पर्यटन प्रभारी पुष्पा सिंह पार्क के द्वारा अंदर के नियम विरुद्ध हो रही सफारी संचालन में कार्यवाही में पीछे नहीं रही
बघीरा चालू होने से स्पीड नियंत्रण
उपरोक्त मामले में विविध हो की संरक्षित क्षेत्र के अंदर जैसे ही सफारी का गेट खुलता था गेट खुलते ही मानो की वाहनों की रेस चालू हो जाती थी पर्यटक यह नहीं समझ पाता था की हम जंगल सफारी करने आए हैं, या कार रेसिंग में, जिस पर नियंत्रण पाने के लिए उप संचालक प्रकाश कुमार वर्मा व पर्यटन प्रभारी पुष्पा सिंह ने पर्यटक वाहनों में जीपीएस से चलने वाला बघीरा ऐप का तत्काल संचालन कराया जो पूर्ण रूप से संरक्षित क्षेत्र के अंतर्गत तेज गति से संचालन हो रही सभी सफारियों का पोल खोल दिया, जिस पर क्षेत्र संचालक के निर्देशन में पर्यटन प्रभारी पुष्पा सिंह द्वारा लगभग 1 से 2 लाख रुपए तक की जुर्माने के रूप में नियम उल्लंघन करने वालों से राशि वसूल कर शासन के खाते में जमा कराई गई जिसका आज नियम उलंघन कर्ताओं द्वारा विरोध किया जा रहा है और रोक लगाने की मांग की जा रही है किंतु प्रबंधन जीपीएस बघीरा ऐप बंद करने को तैयार नहीं है
मनमर्जी गाइड बंद
भारत सरकार व मध्य प्रदेश सरकार वन प्राणियों के हित में चाहे सुरक्षा दृष्टि से क्यों ना कितना ठोस कदम उठा लेकिन लोग काले कारनामों का कहीं ना कहीं से उपाय बना ही लेते हैं विविध हो की 2012 के बाद जब 20% भाग में संरक्षित क्षेत्र में सफारी संचालन करने का आदेश जारी किया गया तो भारत राजपत्र के अनुसार कड़े से कड़े नियम बनाए गए जिसमें यह नियम लाया गया है की वाहन से वाहन की दूरी 500 मी पर प्रवेश गेट से रवाना की जाएगी और पार्क के अंदर जंगल सफारी के दौरान वाहन से वाहन की दूरी 50 मी साथ ही किसी भी वन्य प्राणियों के पास 15 से 20 मिनट से अधिक न रुकने का और किसी वन्य प्राणियों को व बाघों को घेरकर न दिखाने प्रावधान लाया गया, जिस पर कुछ पर्यटक, होटल संचालक, व गाइडों द्वारा , अपना अनुभव और अच्छा कार्य होने का दावा करते हुए नियम विरुद्ध तरीके से मनमर्जी गाइड का प्रावधान लाया जिस पर ज्ञात्व्य हो कि पार्क के अंदर देखा गया है यदि किसी भी वाहन में मनमर्जी गाइड को पर्यटक ले जाते हैं तो संबंधित गाइड द्वारा खुलेआम नियम विरुद्ध तरीके से कार्य किया जाता है, कई कई बार तो पार्क के अंदर बाघों को पत्थरों से मार कर उठाने का मामला प्रकाश में आया है, साथी कुछ गाइडों के द्वारा बाघ के दीदार के लिए पर्यटकों से भारी जिप्सी भी तेज गति संचालन होने से पलट गई है वहीं दूसरी तरफ कुछ स्थानीय गाइडों का कहना है कि मनमर्जी गाइड के द्वारा जो किया जा रहा है उससे हमारे टाईगर रिजर्व की छवि धूमिल हो रही है साथ ही प्रबंधन के लिए राजपत्र में 27अगस्त 2021पृष्ठ 592 भाग 3 में मनमर्जी गाइड का प्रावधान भी है जिसमें स्पष्ट लिखा हुआ है की प्रबंधन किसी पर्यटक अथवा रिसोर्ट मालिक द्वारा मांगे जा रहे मनमर्जी गाइड का एक पंजीयन करेगा जिसकी फीस लगभग 1 साल की ₹10.000 रुपए होगी वह मनमर्जी गाइड किसी भी वाहन में किसी भी पर्यटक के साथ बैठकर जा सकता है साथ ही जिस गाइड की ड्यूटी होगी वह गाइड भी उपरोक्त वाहन में जाएगा, किंतु राजपत्र में दिए गए उपरोक्त आदेश का पालन नहीं होता है कारण यह कि यदि पर्यटक की मनमर्जी गाइड के साथ यदि नियमित आवंटित गाइड संबंधित वाहन में सफारी कराने हेतु जाता है तो मनमर्जी गाइड आवंटित गाइड के सामने कुछ भी गलत नहीं कर पाएगा, यदि करता है तो मनमर्जी गाइड की पोल नियमित गाइड द्वारा बाहर आकर खोल दिया जाएगा अब देखना है कि क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय के द्वारा मनमर्जी गाइड के बंद आदेश को लागू करने में कितनी सक्षम हो सकते है या पूर्व की तरह फिर से आदेश को फाइल में दफन कर रख दिया जाता है


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