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आखिर शर्मसार क्यों है बिहार ! जंगलराज की सफाया में बिहार महा जंगलराज कैसे बन गया?

बिहार राज्य के गया जिले में पत्रकार के साथ घटी घटना में विधायक का भूमिका को देखिए!

आखिर हर मोड़ पर बिहार में जाति वाद आकर क्यों खड़ा हो जाता है,क्या ऐसे नेताओं की क्रिया- कलाप से शर्मसार है बिहार?

बिहार की जनता जातिवाद की राजनीति करने वाले नेताओं को लताडे तभी बिहार में अपराध एवं भ्रष्टाचार के बढ़ते ग्राफ तथा माफियाओं की तांड़व एवं दादागिरी पर लगेंगे रोक उक्त बातें पत्रकार कल्याण संघ औरंगाबाद के अध्यक्ष अनिल कुमार मिश्र ने जनसंदेश में कहा है। बिहार के गया जिले में पत्रकारों के साथ घटित घटना एवं क्षेत्रीय विधायक के क्रियाकलाप से मरम्मत श्री मिश्र ने जनसंदेश ने कहा है कि बिहार राज्य में कोई भी जनप्रतिनिधि अगर किसी जात का है तो उन्हें जात से ही वोट एवं समर्थन मांगना चाहिए ,अन्य जातों से वोट या सपोर्ट नहीं माँगनी जाना चाहिए तथा अपने बच्चो को शिक्षा के लिए अपने जात के लोगों पास भेजना चाहिए तथा इनकी चिकित्सा भी अपनी जाति के लोगों से ही करन चाहिए।

श्री मिश्र नें बिहार राज्य के गया जिले में पत्रकार के साथ घटी घटना में विधायक का भूमिका को तारांकित करते हूए कहा बिहार के गया जिले में पत्रकारों के साथ घटी घटना में विधायक जी के भूमिका को देखिए और ऐसे जनप्रतिनिधियों को बिहार के जनता.लताड़े ,तभी बिहार में बढ़ते अपराध व अराजकता एवं माफियाओं की दादागिरी पर रोक लगेगा अन्यथा एक- एक कर हम.सभी वर्ग एवं जात के सभी गरीब लूटे जायेंगे।
श्री मिश्र ने कहा बिहार से जंगलराज की सफाया की चक्कर में बिहार को महा जंगलराज बना दिया गया और निरंकुश होकर माफिया गिरोह बिहारियों को लूट रहे हैं तथा बिहार में माफियाओं का तांडव है।
श्री विष्णु ने बिहार के सुशासन बाबू माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी तथा उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव तथा गया जिले के तमाम प्रशासनिक एवं पुलिस पदाधिकारियों से जानना चाहा है कि करोड़ों -अरबों के घोटाले में संलिप्त लोगों के विरुद्ध कार्रवाई करने की जगह सरकार.में बैठे लोग एव जिला प्रशासन के तमाम अधिकारी मूकदर्शक क्यों है, यह अहम सवाल जनमानस के सम्मान में है ,
आखिर सुशासन राज में बिहार की जनता सभी जगहों पर लुटे क्यों जा रहे हैं और बिहार के आम जनता चुप्पी साधे बैठे हुए क्यों हैं ,क्या इसके प्रति केवल पत्रकारों की ही जवाबदेही बनता है ,जरा सोचिए आप के जनप्रतिनिधि क्या कर रहे हैं इनके संरक्षण में आपके आंखों के सामने आपको हको को कैसे लूटा जा रहा है गरीबों को राशन देने के नाम पर अच्छे चावल बाजार में बैठ जा रहे हैं और जगह घटिया एवं सड़े गले खुद ही मिले चावल एवं मिट्टी व कचरा मिले हुए गेहूं जनता को मिलता है 5 किलो की जगह 4 किलो अनाज दिया जाता है सरकार द्वारा निर्धारित मूल की जगह ₹1 अधिक लिए जाते हैं । उपभोक्ताओं को दिए गए राशन भी तौल मे कम होते हैं । सारी बात को सरकार से लेकर जिला प्रशासन के लोग जानते हैं। फिर भी मूकदर्शक है । क्या बिहार में बढ़ती अराजकता के लिए सरकार में बैठे लोग एवं जिला प्रशासन जवाबदेह नहीं हैं ? माफियाओं के पास बिना मेहनत के अगाध संपत्ति होगे तो बिहार में अराजकता फैलाने के लिए माफियाओं का तांडवन नहीं होगा है।
यस सर विदित है कि सरकार द्वारा उचित दाम पर वक्ताओं के लिए राशन की खरीदारी हैं होता है। आखिर अच्छे राशन कहां चले जाते हैं और उपभोक्ताओं को सड़े गले चुन्नी खुद ही मिलने चावल तथा कचरा एवं मिट्टी मिले हुए गेहूं कहां से मिलते हैं और जांच के नाम पर जिले में बैठे लोग सरकार के आदेश को ठेंगा कैसे दिखाते आ रहे हैं क्या इसकी जवाब सरकार में बैठे लोग पत्रकारों को दे सकते हैं अगर नहीं तो पत्रकारों को बिहार में एकजुट होना होगा और सत्तासीन सरकार एवं अपराधियों के संरक्षक प्रशासनिक अधिकारियों को बिहार से उखाड़ फेंकने के लिए एकजुट होकर के आवाज को बुलंद करना होगा। देखते हैं बिहार में माफिया गिरोह के कितनी औकात है कितना पत्रकार पर हमला करेंगे, उनकी औकात को तौल दिया जाएगा, एक भी माफिया गिरोह बिहार में नहीं बच पाएंगे जरूरत है पत्रकारों की एकजुट होकर जनता को अपने अधिकार के प्रति जागरूक करने का तथा उनके अधिकार हनन के मामले में बढ़-चढ़कर पत्रकारों को भाग लेने का, फिर अंग्रेजों के चाटुकार माफिया गिरोह के लोग भाग खड़े होंगे और बिहार में लोकतंत्र की सरकार होगी।


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