पंकज कुमार पाठक,संवाददाता पदमा, समाज जागरण
पदमा – प्रखंड क्षेत्र में महिलाओं ने संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना से पारंपरिक जितिया व्रत रखा। तीन दिवसीय इस व्रत की शुरुआत पहले दिन शुद्ध आहार व संयम के साथ होती है, दूसरे दिन महिलाएँ निर्जला उपवास कर भगवान जीमूतवाहन की पूजा-अर्चना करती हैं, जबकि तीसरे दिन पारण के साथ व्रत का समापन होता है।
धार्मिक मान्यता है कि जितिया व्रत करने से संतान को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता और उनके जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। लोककथा के अनुसार भगवान जीमूतवाहन ने अपने प्राणों की आहुति देकर नागवंश की रक्षा की थी। उनकी निस्वार्थ भावना और त्याग से प्रभावित होकर माताएँ यह व्रत करती हैं, ताकि उनके बच्चों की उम्र लंबी हो और जीवन मंगलमय बने।
इस अवसर पर घर-घर में विशेष प्रकार के पकवान और पारंपरिक भोजन बनाए गए। व्रत के चलते स्थानीय बाजारों में भी खासा उत्साह देखा गया। साग-सब्जी, दलहन और अन्य सामग्रियों की बढ़ी हुई मांग से बाजारों में रौनक रही। विशेषकर मडुआ(रागी), घंघरी-बर्रई (एक प्रकार की दाल), कंदा ,झिंगी,और पोया साग जैसी स्थानीय सब्जियों की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई।
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