समाज जागरण रंजीत तिवारी
वाराणसी। शारदीय नवरात्रि के महापुनीत पर्व महानवमी पर आज समूचा परिवेश मां भगवती की भक्ति के रंग में सराबोर नजर आया। शक्ति उपासना के इस परम पावन अवसर पर खुशी त्रिपाठी द्वारा आयोजित भव्य कन्या पूजन अनुष्ठान ने सनातन धर्म की गौरवशाली परंपराओं और नारी शक्ति के प्रति अगाध श्रद्धा को बेहद प्रभावशाली ढंग से रेखांकित किया। इस पावन अनुष्ठान में मां दुर्गा के नौ विग्रहों के प्रतीक स्वरूप पधारीं नन्हीं कन्याओं का स्वागत साक्षात जगतजननी की तरह किया गया।
भक्ति भाव में लीन खुशी त्रिपाठी ने सबसे पहले पूरे आदर के साथ सभी नौ देवियों के चरण पखारे और उस पावन जल को माथे से लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया। इसके पश्चात, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कन्याओं के भाल पर कुमकुम, चंदन और अक्षत का दिव्य तिलक सजाया गया और उन्हें लाल सौभाग्य चुनरी ओढ़ाई गई। जब धूप-दीप के संग महाआरती की थाल घूमी, तो घंटियों की सुमधुर ध्वनि और ‘जय माता दी’ के गगनभेदी जयकारों से वहां आध्यात्मिक ऊर्जा से स्पंदित हो उठा।
पूजन के उपरांत, पूरी शुचिता और पवित्रता से तैयार सात्विक महाप्रसाद (हलवा, पूड़ी, काले चने और मौसमी फल) बालिकाओं को अत्यंत मनुहार और आत्मीयता के साथ परोसा गया। अनुष्ठान की पूर्णता पर खुशी त्रिपाठी ने पूर्ण समर्पण भाव से सभी कन्याओं के समक्ष शीश नवाकर सुख, समृद्धि, शांति और लोक-कल्याण का मंगल आशीर्वाद मांगा। विदाई की वेला में देवियों को विशेष उपहार, श्रृंगार सामग्री और मंगल दक्षिणा भेंट की गई, जिसे पाकर बच्चों के चेहरों पर खिली निश्छल मुस्कान ने इस पूरे आयोजन को सार्थकता प्रदान कर दी। यह दिव्य आयोजन आस्था, सेवा और वात्सल्य रस की एक अनुपम मिसाल बन गया।
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