नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA को लोकसभा चुनाव की घोषणा होने से ठीक पहले लागू कर दिया गया है. विपक्ष टाइमिंग पर सवाल उठा रहा है. विवादास्पद कानून पारित होने के चार साल बाद केंद्र ने यह कदम उठाया है. अब पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए बिना दस्तावेज वाले गैर-मुस्लिम प्रवासियों को नागरिकता मिल सकेगी. असम और पश्चिम बंगाल में कई साल से यह मुद्दा गरम रहा है.
कल से असम में विपक्षी दल प्रदर्शन भी करने लगे हैं. आज राज्यव्यापी हड़ताल की घोषणा की गई थी. हालांकि इसे लागू करने की अपनी वजह है. केंद्र सरकार और बीजेपी को कई सर्वे से पता चला था कि चुनाव से पहले इसे लागू करना बेहद जरूरी है. अकेले यह एक फैसला पश्चिम बंगाल की कम से कम 8 लोकसभा सीटों पर बाजी पलट सकता है.
दिसंबर 2019 में सिटिजनशिप बिल संसद में रखे जाने के चार साल बाद सोमवार को केंद्र ने सीएए कानून लागू कर दिया. पश्चिम बंगाल, असम और यूपी में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद इसे रोक दिया गया था. ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि बीजेपी के राजनीतिक हितों को पूरा करने के लिए सीएए लागू किया गया है. एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बंगाल के सीमावर्ती जिलों और अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे दूसरे राज्यों में व्यापक सर्वे के बाद सरकार ने यह फैसला लिया है.
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