अब चाय पानी नही, बल्कि चाय अलग और पानी अलग है.

समाज जागरण

नंस्कार मैं रमन कुमार,  वो दिन अब सपने लगने लगे है जब चाय पानी, यानि की चाय के साथ आप पानी मुफ्त मे पी सकते थे. अब चाय भले की 10 रुपये की हो लेकिन पानी 20 रुपये की है.

आप किसी होटल रेस्टोरेंट मे जाते है तो अब आपको स्टील के गिलास और मगा नही मिलेंगे. बल्कि आपको बोतल मांगना पड़ेगा या फिर बोतल ही मिलेगा जो की चार्जेबले होगा. अब हम बोतल पीने की आदि हो चुके है.

अब आप किसी रेस्टोरेंट मे जाते है तो खाना खाने से पहले पूछ लीजिये की पानी कितने की है. अन्यथा आप खाना खा लेंगे बाद मे पता चले की आपके पास मे पानी की बोतल खरीदने के लिए पैसे नही है.

आजकल आपको धर्म के नाम पर राजनीती के नाम पर सेकड़ो लोग खाना बाटते तो मिल जायेंगे लेकिन पानी उनके पास मे भी नही होते है.

हम उस भारत देश के वासी है जहाँ सब कर्म की पानी से शुरू होता है. ऐसे मे पानी के महत्व को भी समझना पड़ेगा. जिस भारत मे पहले लोग मेहमानों को पानी पिलाते थे, उनके हाथ पैर धोने के लिए पानी दिया करते थे उसी भारत मे आज चाय तो पीला देते है लेकिन पानी के लिए कोई नही पूछता है. क्यों पूछे पानी महँगी जो है. फिर पानी तो सभी मे मिलाने के काम आते है. हिंदी गाना तो आपने सुना ही होगा ” पानी रे पानी तेरा रंग कैसा, जिस मे मिला दो उस जैसा.

आप अगर माने तो मेरा एक सलाह है आप खाना कभी मत बाटीयेगा पानी बाटीयेगा क्यूंकि आज बहुत आवश्यकता है.

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उत्तरप्रदेश के राजधानी लखनऊ से रमन झा

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