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अफगानिस्तान को पाकिस्तान से मिला जख्म, “अब भारत लगायेगा मरहम”

नई दिल्ली: अफगानिस्तान ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि पाकिस्तान के साथ बिगड़ते रिश्तों के चलते उसे भारत की ओर झुकना पड़ा है। अफगान स्वास्थ्य मंत्री मौलवी नूर जलाल जलाली ने भारत दौरे के दौरान कहा कि फार्मास्यूटिकल सप्लाई के लिए भारत एक भरोसेमंद और विश्वसनीय साझेदार बनकर उभरा है।

मंत्री जलाली के अनुसार, पाकिस्तान के साथ संबंधों में आई गिरावट ने अफगानिस्तान को वैकल्पिक सहयोगियों की तलाश के लिए मजबूर किया। इस संदर्भ में भारत ने कैंसर की दवाओं, वैक्सीन और अन्य जरूरी स्वास्थ्य सामग्री उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।

भारत सरकार ने दोहराया कि वह अफगान जनता को मानवीय आधार पर सहायता देता रहेगा, चाहे क्षेत्रीय हालात कितने ही जटिल क्यों न हों। विश्लेषकों का मानना है कि यह दौरा Health Diplomacy के जरिए बदलते क्षेत्रीय समीकरणों की ओर इशारा करता है।

भारत-अफगानिस्तान स्वास्थ्य सहयोग न केवल मानवीय जरूरतों को पूरा कर रहा है, बल्कि दक्षिण एशिया में भारत की सॉफ्ट पावर और रणनीतिक संतुलन को भी मजबूत कर रहा है।

पाकिस्तान और अगानिस्तान के बीच बिगड़ते रिस्ते ने अफगान को भारत की ओर झुकने के लिए मजबूर किया या फिर विकल्प जिसकी जरूरत अफगानिस्तान को था। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढते तनाव के बीच अफगान स्वास्थ्य मंत्री मौलवी नूर जलाल जलाली का यह ब्यान भारत के लिए भी राहत देने वाली है। हालांकि भारत हमेशा मानवीय तरीके से अफगानिस्तान को मदद करता रहा है। भारत का यह आश्वासन भी कई मायने रखता है जिसमे कहा गया है “क्षेत्रीय हालात कैसे भी हो लेकिन भारत अफगानिस्तान को मानवीय सहायता देता रहेगा।”


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