राजस्व विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों पर सदन में गरजे अख्तरुल ईमान, कहा -सिर्फ कागजी प्रक्रिया हो रही है

वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो किशनगंज
अमौर/पूर्णिया।
अख्तरुल ईमान ने बिहार विधानसभा में भूमि एवं राजस्व विभाग पर हुई चर्चा के दौरान सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज्य की भूमि व्यवस्था पूरी तरह अव्यवस्थित हो चुकी है और आम जनता आज भी दाखिल-खारिज, जमाबंदी, भू-मापी, भू-सुधार एवं जमीन विवाद जैसे मामलों में भारी परेशानियों का सामना कर रही है।उन्होंने सदन में आरोप लगाया कि ऑनलाइन भूमि सेवाओं के दावे केवल कागजी साबित हो रहे हैं। जिस एजेंसी को ऑनलाइन खाता-खेसरा चढ़ाने का कार्य सौंपा गया था,

उसने अधिकांश अभिलेखों में भारी त्रुटियां कर दी हैं। खाता, खेसरा और रकबा से संबंधित कई प्रविष्टियां गलत दर्ज कर दी गई हैं, जिसके कारण लोगों को अपने ही जमीन के कागजात दुरुस्त कराने के लिए अंचल कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।उन्होंने कहा कि दाखिल-खारिज के मामले महीनों तक लंबित रहते हैं। जमाबंदी में त्रुटियों का सुधार समय पर नहीं होता, परिमार्जन की प्रक्रिया अटकी रहती है और वर्षों से भूमि मामले लंबित पड़े हैं।अख्तरुल ईमान ने सदन में उदाहरण देते हुए कहा कि अमौर की रजिया खातून का मामला कथित रूप से रिश्वत नहीं देने के कारण अस्वीकृत कर दिया गया।

वहीं फैयाज अंसारी, जो 70 वर्षों से अपनी भूमि पर दखल में हैं, उनसे ₹5 लाख की रिश्वत मांगी गई। राशि नहीं देने पर उनका दाखिल-खारिज नहीं किया गया।उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्व विभाग के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों द्वारा डकैती जैसी स्थिति उत्पन्न कर दी गई है। जब तक ऐसे अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक व्यवस्था में सुधार संभव नहीं है। अफसरशाही रवैये ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है, जिससे गरीब, किसान और कमजोर वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।विधायक ने सरकार से मांग की कि भूमि एवं राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली की उच्चस्तरीय समीक्षा की जाए,दाखिल-खारिज और जमाबंदी की प्रक्रिया को समयबद्ध एवं पारदर्शी बनाया जाए, ऑनलाइन सेवाओं को तकनीकी रूप से सुदृढ़ किया जाए तथा भ्रष्ट अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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