प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने रेहड़ी-पटरी और स्ट्रीट वेंडरों के हित में एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित करते हुए हजारों छोटे व्यापारियों को बड़ी राहत दी है। यह आदेश रिट याचिका संख्या 23202/2026 (अमित कुमार एवं 22 अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य) में दिया गया।
कोर्ट का अहम निर्देश
न्यायालय ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ताओं को उनके वर्तमान कार्यस्थलों और दुकानों से न तो बेदखल किया जाएगा और न ही उनके व्यवसाय में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न की जाएगी। यह आदेश विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में फुटपाथ और रेहड़ी-पटरी पर काम करने वाले लाखों स्ट्रीट वेंडरों की आजीविका सुरक्षा से जुड़ा हुआ माना जा रहा है।
स्ट्रीट वेंडरों की आजीविका पर असर
यह मामला उन लाखों लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो रोज़मर्रा की आजीविका के लिए सड़क किनारे छोटे व्यापार पर निर्भर हैं। न्यायालय के इस आदेश से फिलहाल उन्हें राहत मिली है और उनके रोजगार पर तत्काल खतरा टल गया है।
संगठन ने बताया ऐतिहासिक कदम
इस संबंध में रेहड़ी पटरी संचालक वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं संस्थापक श्याम किशोर गुप्ता ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि यह निर्णय स्ट्रीट वेंडरों के अधिकारों और आजीविका की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि यह आदेश वेंडरों के हितों की रक्षा करने में मील का पत्थर साबित होगा।
जनहित से जुड़ा मामला
यह आदेश न केवल याचिकाकर्ताओं बल्कि पूरे प्रदेश के स्ट्रीट वेंडरों के लिए आशा की किरण माना जा रहा है। स्वप्निल सिंह एडवोकेट उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने इसे जनहित में लिया गया एक सराहनीय कदम बताया है और उम्मीद जताई है कि अगली सुनवाई में भी वेंडरों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे।
निष्कर्ष:
इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह अंतरिम आदेश स्ट्रीट वेंडरों की आजीविका और उनके मौलिक अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कानूनी हस्तक्षेप माना जा रहा है, जिससे हजारों परिवारों को राहत मिली है।
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