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प्रशासन को खुली चुनौती! 24 घंटे में फिर सरकारी जमीन पर कब्जा, भूमाफियाओं की दबंगई से सहमे ग्रामीण

ट्रैक्टर चलाकर हटाया गया अवैध चाय पत्ती का बागान, कार्रवाई के अगले ही दिन फिर कर लिया सरकारी जमीन पर कब्जा

वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो किशनगंज।
21 जुलाई। बेलवा काशीपुर में सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन द्वारा चलाया गया अभियान महज 24 घंटे के भीतर ही सवालों के घेरे में आ गया है। रविवार को प्रशासन ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में ट्रैक्टर चलाकर सरकारी जमीन पर लगे अवैध चाय पत्ती के बागान को हटाया था। लेकिन कार्रवाई के अगले ही दिन सोमवार को भूमाफियाओं ने उसी सरकारी जमीन पर दोबारा कब्जा कर प्रशासन को खुली चुनौती दे दी।


स्थानीय लोगों के अनुसार, प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई का दावा करते हुए सरकारी भूमि से अवैध चाय पत्ती का बागान हटाया था। कार्रवाई के दौरान भारी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। हालांकि अभियान समाप्त होते ही सरकारी जमीन की सुरक्षा के लिए कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई। इसी का फायदा उठाते हुए अतिक्रमणकारी अगले ही दिन फिर सक्रिय हो गए और दोबारा जमीन पर कब्जा कर लिया।


ग्रामीणों का कहना है कि जिस जमीन को प्रशासन ने ट्रैक्टर चलाकर अतिक्रमण मुक्त कराया था, उसी पर 24 घंटे के भीतर दोबारा कब्जा हो जाना प्रशासनिक कार्रवाई की गंभीर विफलता को दर्शाता है। लोगों का आरोप है कि यदि कार्रवाई के बाद प्रशासन ने मौके पर निगरानी रखी होती तो भूमाफिया दोबारा कब्जा करने का साहस नहीं कर पाते।


ग्रामीणों का यह भी कहना है कि सरकारी जमीन पर लगातार हो रहे अवैध कब्जे से आम लोगों में भय और नाराजगी का माहौल है। उनका आरोप है कि भूमाफिया प्रशासनिक कार्रवाई को भी चुनौती देने से नहीं डर रहे हैं, जिससे साफ संकेत मिलता है कि उन पर कानून का कोई खौफ नहीं रह गया है।


स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे क्षेत्र को स्थायी रूप से अतिक्रमण मुक्त कराया जाए, सरकारी भूमि का सीमांकन कर बोर्ड लगाया जाए तथा लगातार निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही दोबारा कब्जा करने वाले लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जे की पुनरावृत्ति न हो।


24 घंटे के भीतर सरकारी जमीन पर दोबारा कब्जा होने की घटना ने प्रशासन की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस खुली चुनौती का क्या जवाब देता है और सरकारी भूमि को स्थायी रूप से अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए क्या कदम उठाता है।


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