अमलाई। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की अमलाई क्षेत्र की ओपन कास्ट खदानों में अवैध कोयला उत्खनन आम जनजीवन के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। खदान क्षेत्रों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन कोयला कंपनी प्रबंधन और औद्योगिक सुरक्षा बल की भूमिका केवल दिखावटी प्रतीत हो रही है।
एसईसीएल द्वारा डी सेक्टर की खुली खदान से कोयला निकासी के बाद आसपास के रिहायशी इलाकों में रहने वाले गरीब तबके के लोग, बेरोजगारी और गरीबी के कारण, अपनी जान जोखिम में डालकर प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश कर रहे हैं। रंजीत दफाई, सिद्ध बाबा, शांति नगर जैसे इलाकों में खदान महज 50 मीटर की दूरी पर स्थित है, जहां लोग पहाड़नुमा ओबी (ओवर बर्डन) मिट्टी के ढेर में सुरंगनुमा रास्ते बनाकर बचे हुए कोयले को निकाल रहे हैं।
बताया जा रहा है कि लोग पहले ओबी मिट्टी पर आधी दूरी तक चढ़कर उसमें होल बनाते हैं, फिर कोयले की छंटाई करते हैं। इस दौरान सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं होते, जिससे किसी भी समय मिट्टी धंसने या दबने से गंभीर हादसा हो सकता है। हैरानी की बात यह है कि यह सब औद्योगिक सुरक्षा बल की नजरों के सामने हो रहा है, जबकि ई सेक्टर स्थित सुरक्षा कैंप खदान से मात्र 100 मीटर की दूरी पर मौजूद है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे पूर्व भी इस क्षेत्र में कई घटनाएं घट चुकी हैं, इसके बावजूद एसईसीएल सोहागपुर क्षेत्र प्रबंधन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मूकदर्शक बना हुआ है। सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाला औद्योगिक सुरक्षा बल (एसआईएसएफ) भी अपने दायित्वों का निर्वहन करने में असफल नजर आ रहा है।
इस संबंध में अमलाई नगर के समाजसेवी एवं पार्षद पवन चीनी ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि खुले तौर पर सुरक्षा के अभाव में अवैध कोयला उत्खनन होना आम जनजीवन के लिए खतरे की घंटी है। गरीब परिवार अपनी जान हथेली पर रखकर कोयला निकालने को मजबूर हैं, लेकिन कोयला कंपनी प्रबंधन और प्रशासन आंख मूंदे बैठे हैं। उन्होंने मांग की कि सुरक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन शीघ्र इस ओर ध्यान दे, ताकि किसी बड़े और जानलेवा हादसे को रोका जा सके।
Discover more from समाज जागरण
Subscribe to get the latest posts sent to your email.



