समाज जागरण*
राजगढ़ मीरजापुर/ सुकृत वन रेंज में अवैध लकड़ी लदी पिकअप छोड़े जाने के मामले में डीएफओ ने कड़ा रुख अपनाया है। रेंजर के स्पष्ट निर्देश के बावजूद वाहन को छोड़े जाने पर सेक्शन ऑफिसर अखिलेश्वर दूबे और वनरक्षक को ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी किया गया है। यह घटना राजगढ क्षेत्र के भवानीपुर वन चौकी क्षेत्र की है, जिससे वन कटान और वन कर्मियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

जानकारी के अनुसार, सुकृत वन क्षेत्राधिकारी हिमांशु कुमार को सूचना मिली थी कि क्षेत्र से अवैध रूप से काटी गई हरी लकड़ी एक पिकअप वाहन पर ले जाई जा रही है। रेंजर के निर्देश पर वन विभाग की टीम ने घेराबंदी की। गुरुवार रात करीब आठ बजे किसान इंटर कॉलेज के पास लकड़ी लदी पिकअप को पकड़ लिया गया था। हालांकि, पकड़ने के कुछ ही देर बाद वनरक्षक ने वाहन को मौके से छोड़ दिया।
इस मामले में विरोधाभासी बयान सामने आए हैं। निकरिका ग्राम प्रधान कमलेश कुमार पाल ने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत के अमृत सरोवर के भीटे से एक मोटा हरा पेड़ काटकर चोरी किया गया था। वहीं, वनरक्षक का कहना है कि पिकअप पर लदी लकड़ी निकरिका की नहीं, बल्कि कम्हरिया गांव की थी।
सवाल यह उठता है कि जब रेंजर के निर्देश पर वाहन को संदिग्ध मानकर पकड़ा गया था, तो वनरक्षक ने बिना उच्चाधिकारियों की अनुमति और बिना ठोस जांच के उसे मौके से क्यों जाने दिया। इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए, वनक्षेत्राधिकारी सुकृत ने शुक्रवार को सेक्शन ऑफिसर अखिलेश्वर दूबे और वनरक्षक से कारण बताओ नोटिस के माध्यम से स्पष्टीकरण मांगा है।
मिर्जापुर के डीएफओ राकेश कुमार ने इस मामले को गंभीरता से लेने की बात कही। उन्होंने बताया, “रेंजर के निर्देश के बाद भी वाहन छोड़ना अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। सेक्शन ऑफिसर और वनरक्षक को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। पूरे मामले की जांच कराई जा रही है, जांच रिपोर्ट में दोषी पाए जाने पर संबंधित कर्मियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।”
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