बंदोबस्ती जमीन पर बलपूर्वक कब्ज़े की कोशिश, रैयतों में आक्रोश

समाज जागरण | दीपक सरकार

छत्तरपुर प्रखंड क्षेत्र के पंचायत कवल अंतर्गत ग्राम कवल में बंदोबस्ती जमीन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सर्वे खतीयान के अनुसार खाता संख्या 65, प्लॉट संख्या 152, रकबा 103.75 एकड़ भूमि गैरमंजूरआ मालिकाना है, जो जंगल–झाड़ी के रूप में दर्ज है। मौजा पंजी-दो के अनुसार उक्त भूमि में से कुल 9.98 एकड़ जमीन रैयत तिलेशरी देवी (पति रामलखन यादव), उमेश कुमार यादव, दिलीप कुमार यादव एवं रिकेश कुमार यादव (सभी पिता रामलखन यादव) के नाम बंदोबस्त की गई है।

रैयतों का कहना है कि वे वर्ष 1987 से लगातार उक्त भूमि पर जोत-कोड कर खेती करते आ रहे हैं। वर्ष 2003 में अंचलाधिकारी द्वारा जांच के उपरांत विधिवत रूप से उनके नाम से बंदोबस्ती की पुष्टि की गई थी। इसके बाद से वे नियमित रूप से खेती कर रहे हैं और जमीन का रसीद भी कटवा रहे हैं।

आरोप है कि कुछ असामाजिक तत्वों के बहकावे में आकर 9 जनवरी 2026 को हरी भुईयां, संतोष भुईयां, अशोक भुईयां, श्यामा भुईयां, प्रसाद भुईयां, ग्नोरी भुईयां, सुखड़ी भुईयां, सुखदेव भुईयां, नन्हू राम, श्रावण राम, अकलेश भुईयां, प्रदीप भुईयां, बिफान भुईयां, सूरज भुईयां, सुनर भुईयां, अमारिक भुईयां, संजय राम एवं बसंत भुईयां द्वारा इस वर्ष खेती नहीं होने का लाभ उठाते हुए उक्त जमीन पर झोपड़ी बनाकर मालिकाना हक जताने की कोशिश की गई।

बताया गया कि पूर्व में इन लोगों द्वारा न्यायालय में अपील भी दायर की गई थी, जिसमें वर्ष 2007 में जांच का आदेश छत्तरपुर अंचलाधिकारी को सौंपा गया। जांच के उपरांत वर्ष 2009 में अंचलाधिकारी द्वारा न्यायालय को भेजी गई रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि उक्त भूमि पर इनके द्वारा किसी प्रकार का दखल-कब्जा नहीं पाया गया।

इसके बावजूद वर्तमान में फिर से जमीन पर अवैध कब्जे का प्रयास किए जाने से रैयतों में रोष व्याप्त है। पीड़ित रैयतों ने प्रशासन से मांग की है कि न्यायालय एवं अंचलाधिकारी की रिपोर्ट के आलोक में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और बंदोबस्ती जमीन की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

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