विजय शंकर पाण्डेय जिला संवाददाता/समाज जागरण
राबर्ट्सगंज सोनभद्र
स्थानीय दुधहिया देवी मंदिर के प्रांगण में आयोजित नौ दिवसीय भव्य श्रीराम कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।कथा व्यास श्री राम मोहन दास रामायणी ने अपनी अमृतमयी वाणी से भक्तों को भावविभोर कर दिया।कथा वाचक ने उत्तर प्रदेश की पावन धरती और त्रिवेणी संगम की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान राम की जन्मस्थली होना हमारे लिए सौभाग्य की बात है।उन्होंने जोर देकर कहा रामायण केवल एक ग्रंथ नहीं बल्कि हृदय परिवर्तन करने वाली कथा है।सुख और दुख हमारे कर्मों पर आधारित हैं।अच्छे और बुरे कर्मों का फल निश्चित मिलता है।
माता सती के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे एक झूठ के कारण उन्हें वर्षों तक तपस्या करनी पड़ी।उन्होंने गृहस्थ जीवन में आपसी विश्वास और सत्य की महत्ता पर प्रकाश डाला।कथा के दूसरे दिन शिव विवाह का प्रसंग सुनाया गया जो आकर्षण का केंद्र रहा।जब भगवान शिव की बारात निकली तो भूत-प्रेतों के वेश में बच्चों ने जमकर नृत्य किया जिसे देख भक्त आनंदित हो उठे।पूरा पंडाल “हर-हर महादेव” और “जय श्री राम” के उद्घोष से गुंजायमान रहा।”जिसका कोई संगी साथी नहीं, उसका सहारा ईश्वर है।ज्योति से ज्योति जलाते चलो,प्रेम की गंगा बहाते चलो”तुम हमारे हो प्रभु हम तुम्हारे हैं”भजनों पर श्रद्धालु भावुक होकर झूमने लगे।कथा के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि नफरत के बदले मोहब्बत बांटना ही सच्ची मानवता है।प्रभु का स्मरण और अटूट भक्ति ही जीवन की नैया को पार लगा सकती है।
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