सामाजिक परिवर्तन की आवाज और कला की उड़ान: बीकानेर की बेटी ज्योति की कहानी

संकलन कर्ता/कृष्ण चतुर्वेदी

हम अक्सर सोचते हैं कि जो लोग कंप्यूटर या तकनीक की पढ़ाई करते हैं, वे केवल दफ्तर के कामों में ही उलझे रहते होंगे। लेकिन बीकानेर की ज्योति स्वामी को देखकर यह सोच बदल जाती है। ज्योति जी एक ऐसी शख्सियत हैं जिन्हें एक साथ कई काम करना पसंद है। वे अस्पताल में रेडियो diagnosis रिपोर्टिंग and pcpndt act का कार्य भी संभालती हैं, सुंदर कविताएं भी लिखती हैं और राजस्थान की पुरानी कलाओं को भी जिंदा रख रही हैं।

पढ़ाई और नौकरी
ज्योति जी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई के बाद बीटेक और एमबीए जैसी बड़ी डिग्रियां हासिल कीं। आज वे सरकारी अस्पताल में असिस्टेंट प्रोग्रामर के पद पर काम कर रही हैं। अपनी ड्यूटी को वे पूरी जिम्मेदारी से निभाती हैं, लेकिन उन्होंने कभी अपनी कला और शौक को पीछे नहीं छूटने दिया।

साहित्य और सम्मान
ज्योति जी को बचपन से ही लिखने का शौक है। वे अपनी कविताओं में बहुत ही सीधी और दिल को छू लेने वाली बातें लिखती हैं। उन्होंने बचपन के दिन’, ‘काव्य दर्शन’, ‘खुशबू मेरे वतन की’ और ‘सड़क सुरक्षा की स्वर लहरियां’ जैसे साझा संकलनों में उनकी रचनाएं संकलित हैं। तो वहीं उन्होंने अखबारों में अपना स्थान बनाया है ।राजस्थान पत्रिका, सूरतगढ़ टाइम्स और युगपक्ष जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में उनकी कविताओं (जैसे ‘आत्मनिर्भर’, ‘बेटी की मां’, ‘राजस्थानी कविताएं’) का नियमित प्रकाशन होता है। साहित्य में उनके इस अनुपम योगदान के लिए उन्हें कई शीर्ष सम्मान मिल चुके हैं जिनमें मुख्य रूप से काशी कविता मंच द्वारा ‘गोपाल रत्न सम्मान 2022’, प्रेम फाउंडेशन द्वारा ‘काव्य रत्न अलंकरण’ और जनभाषा हिंदी द्वारा ‘कलम श्री सम्मान’ शामिल है।

मुसीबत में सेवा (कोरोना योद्धा)
जब पूरे देश में कोरोना फैला था, तब ज्योति जी ने एक बहादुर सिपाही की तरह काम किया। उन्होंने अपनी परवाह किए बिना लोगों की जांच (RT-PCR) और टीकाकरण में मदद की। उनके इस जज्बे को देखकर राजस्थान सरकार के शिक्षा मंत्री ने उन्हें ‘कोरोना योद्धा’ (2020) कहा और बीकानेर पुलिस ने उन्हें ‘डॉटर ऑफ बीकानेर’ (2022)(बीकानेर की बेटी) के नाम से सम्मानित किया। नगर निगम द्वारा भी उन्हें विशेष चिकित्सा सेवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वही उन्होंने स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपना विशेष योगदान देते हुए सड़क सुरक्षा माह 2025 में ‘ब्रांड कैंपेनर’ के रूप में सक्रिय भूमिका निभाते हुए जागरूकता अभियानों का नेतृत्व किया।

पुरानी कला को नया रूप
कला ज्योति स्वामी की आत्मा में बसती है। वे न केवल एक कलाकार हैं, बल्कि राजस्थान की लुप्त होती कलाओं की संरक्षक भी हैं।
मांडना और रंगोली: भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित ‘अमृत महोत्सव’ में रंगोली प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया। बीकानेर स्थापना दिवस पर ऐतिहासिक चौराहों को मांडना कला से सजाकर हेरिटेज संरक्षण का कार्य किया।
इवेंट मैनेजमेंट: अंतरराष्ट्रीय ऊंट महोत्सव में लगातार तीन वर्षों तक (2023, 2024, 2025) में रंगोली, मेहंदी और पेंटिंग प्रतियोगिताओं की ‘सर्वश्रेष्ठ समन्वयक’ के रूप में पर्यटन विभाग द्वारा सम्मानित होती रही हैं।
उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे आँखों पर पट्टी बांधकर ‘इको-फ्रेंडली गणेश’ बनाना तो जानती ही है साथ ही विदेशियों को भी इसका प्रशिक्षण दे चुकी हैं।

सपनों की उड़ान
अभी हाल ही में उन्होंने ‘मिसेज इंडिया टैलेंटेड’2024 और ‘सुपर वूमेन’2024 जैसे बड़े खिताब जीतकर सबको हैरान कर दिया। एक सजग नागरिक के रूप में उन्होंने समाज के हर वर्ग को प्रभावित किया है।
महिला सशक्तिकरण की बात करें तो उनके इन समस्त कार्यों एवं उपलब्धियों के कारण ही उन्हें ‘अपराजिता अवार्ड 2023’ और ‘वूमेन इंस्पिरेशन अवॉर्ड 2025’ से नवाज़ा गया है। आज उन्हें नारी शक्ति के प्रतीक के रूप में पहचाना जाता है।
बीकानेर के प्रसिद्ध ‘खेलण दो गणगौर’ उत्सव, आर.एन.बी. ग्लोबल यूनिवर्सिटी के फेस्ट और विभिन्न प्रतिभा खोज कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि व निर्णायक के रूप में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। मरू महोत्सव 2025 (जैसलमेर) और राजस्थानी संगम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उनकी उपस्थिति उनके बढ़ते सामाजिक कद को दर्शाती है।

 ज्योति स्वामी जी का जीवन हमें सिखाता है कि अगर हम समय का सही इस्तेमाल करें, तो हम अपनी नौकरी के साथ-साथ अपने शौक को भी बहुत ऊंचे मुकाम पर ले जा सकते हैं। वे बीकानेर की हर उस लड़की के लिए प्रेरणा हैं जो बड़े सपने देखती है।

आलेख निरुपण
डॉ.मधुछंदा, बेंगलुरु

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