जिला चिकित्सालय शहडोल में डॉक्टरों ने बचाई माँ और नवजात बच्ची की जान, बनी उम्मीद की मिसाल
समाज जागरण विजय तिवारी
सोडा फैक्ट्री।कहते हैं हर आँसू दुःख के नहीं होते, कुछ आँसू ऐसे भी होते हैं जो अपार खुशी और जीवन की जीत का प्रतीक होते हैं। केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा आमजन को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने हेतु निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। जिले में संचालित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं जिला चिकित्सालय के माध्यम से मरीजों को निःशुल्क उपचार, सीटी स्कैन, दवाइयाँ, नवजात शिशु उपचार सहित अनेक महत्वपूर्ण सेवाएँ प्रदान की जा रही हैं।

जिले के तहसील बुढार अंतर्गत अमलाई सोडा फैक्ट्री निवासी श्वेता सिंह विगत दिनों जिला चिकित्सालय शहडोल में चिकित्सकीय परामर्श हेतु पहुँचीं, जहाँ जाँच के दौरान पाया गया कि उनकी बीपी अत्यधिक बढ़ी हुई थी तथा शरीर में सूजन है। चिकित्सकों ने बताया कि माँ और गर्भस्थ शिशु दोनों की स्थिति अत्यंत गंभीर है और दोनों की जान को खतरा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए श्वेता सिंह को तत्काल भर्ती किया गया। सोनोग्राफी एवं अन्य आवश्यक जांच के उपरांत चिकित्सकों ने कहा कि माँ और शिशु में से किसी एक को ही बचा पाना संभव हो सकता है।
जिला चिकित्सालय के विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं नर्सिंग स्टाफ ने अपने अथक प्रयास, कुशलता और समर्पण से चुनौती को स्वीकार किया और सफलतापूर्वक ऑपरेशन कर माँ और नवजात बच्ची दोनों की जान बचाई।
जब श्वेता सिंह ने अपनी गोद में स्वस्थ बच्ची को देखा, तो उनकी आँखों से खुशी के आँसू छलक पड़े। उन्होंने कहा, हमने तो उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने मेरी बच्ची को नई जिंदगी दी है। मैं डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ को धन्यवाद करती हूँ।




