कड़ाके की ठंड और घने कोहरे में कराई गईं ब्लॉक स्तरीय खेल प्रतियोगिताएं

लालपुर स्टेडियम में खुले मैदान में बच्चों को घंटों ठिठुरना पड़ा, अभिभावकों में आक्रोश

लखीमपुर खीरी।
जहां एक ओर प्रदेश के कई जनपदों में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे को देखते हुए स्कूलों में अवकाश घोषित किया जा रहा है, वहीं खीरी जिले में शिक्षा विभाग की ओर से मंगलवार से दो दिवसीय बाल क्रीड़ा प्रतियोगिता का आयोजन कर बच्चों को ठंड और कोहरे में खुले मैदान में आने के लिए बाध्य किया गया। शहर से लगभग पांच किलोमीटर दूर स्थित लालपुर स्टेडियम में आयोजित इस खेल रैली ने विभागीय संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

भीषण ठंड, गलन और कोहरे के बावजूद दूर-दराज ग्रामीण इलाकों से छात्र-छात्राओं को प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए बुलाया गया। बताया गया कि निघासन से सुबह 7 बजे, पलिया से सुबह 6 बजे, पसगवां (शाहजहांपुर बॉर्डर के पास) से करीब 90 किलोमीटर, मोहम्मदी से 70 किलोमीटर दूर से शिक्षक बच्चों को लेकर निकले, जबकि रास्तों में घना कोहरा और हाड़ कंपाने वाली ठंड बनी रही।

अभिभावकों ने सवाल उठाया कि यदि इतनी ठंड और कोहरे में बच्चों को बुलाने के दौरान कोई अनहोनी हो जाती, तो इसकी जवाबदेही कौन लेता। उनका कहना है कि इस प्रकार की परिस्थितियों में बच्चों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए। अभिभावकों ने इसे असंवेदनशील और गैर-जिम्मेदाराना निर्णय बताया।

विडंबना यह रही कि जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं अधिकारियों को ठंड के मौसम में संवेदनशीलता बरतने और अनावश्यक आवागमन से बचने के निर्देश दे रहे हैं, वहीं खीरी जिले में शिक्षा विभाग द्वारा 80 से 100 किलोमीटर दूर से बच्चों को बुलाकर आयोजन कराया गया।

प्रतियोगिता स्थल पर भी अव्यवस्थाओं का बोलबाला रहा। बच्चों को ठंड में करीब एक घंटे तक मुख्य अतिथियों के आने का इंतजार करना पड़ा। मंच लंबे समय तक खाली रहा, जबकि छात्र-छात्राएं खुले मैदान में ठिठुरते रहे। दूर-दराज से आई छात्राओं के लिए ड्रेस बदलने की कोई व्यवस्था नहीं, न ही पेयजल की समुचित सुविधा उपलब्ध कराई गई थी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकांश ग्रामीण और गरीब परिवारों के बच्चों के पास पर्याप्त गर्म कपड़े और जूते तक नहीं होते, ऐसे में उन्हें इस तरह की ठंड में खुले मैदान में खड़ा रखना अमानवीय है।

मौके का वीडियो वायरल होने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की कोशिश की गई। हालांकि तब तक बच्चों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी।

इस पूरे मामले ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और बच्चों की सुरक्षा को लेकर उसकी प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

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