महाराज ने राजा परीक्षित को श्रृंगि ऋषि द्वारा श्राप देने का प्रसंग सुनाया
मन्नू शर्मा पराशर समाज जागरण चीफ ब्यूरो प्रमुख
जैतो, 18 सितंबर :श्री कल्याण कमल आश्रम हरिद्वार के अनंत श्री विभूषित 1008 महामंडलेश्वर स्वामी श्री कमलानंद गिरि जी महाराज के शिष्य श्रद्धेय स्वामी श्री सुशांतानंद गिरि जी महाराज ने श्रीमद् भागवत प्रवचन के दौरान राजा परीक्षित को श्रृंगि ऋषि द्वारा सात दिन में उसकी मृत्यु होने का श्राप लगने का प्रसंग सुनाया। महाराज ने कहा कि अनजाने में किया गया अपराध क्षमायोग्य हो सकता है। मगर जान-बूझकर किए गए अपराध का फल हमेशा भोगना पड़ता है। संसार में किसी भी साधना से जान-बूझकर किए गए अपराध की क्षमा नहीं मिल सकती। मगर संत चरणों में बैठककर साधना करने एवं भगवद् चरण वंदना करने से किसी भी तरह का अपराध क्यों न हो गया है, वो क्षमायोग्य हो जाता है और उसके लगने वाले पाप का सदा-सदा के लिए नाश हो जाता है।महाराज जी ने यह विचार जैतो स्थित श्री कल्याण कमल सन्यास आश्रम में 15 दिवसीय श्रीमद् भागवत प्रवचन कार्यक्रम के दौरान वीरवार को प्रवचनों की अमृतवर्षा करते हुए कथा के प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए कहा कि गंगा तट पर अपनी मृत्यु को सुधारने के लिए आया राजा परीक्षित संत चरणों में बैठकर कथा श्रवण कर रहे थे। अंत में शूकदेव मुनि जी के चरणों में बैठकर कथा श्रवण करने के बाद ही उन्हें भी मुक्ति मिली। इसलिए कोई बड़े से बड़ा अपराध ही क्यों न हो गया हो, संत चरणों में बैठने और कथा श्रवण करने से उस अपराधबोध से मुक्ति मिलना संभव है। कथा दौरान जहां श्रद्धालु रोजाना श्रीमद् भागवत प्रवचन श्रवण कर पुण्य-लाभ कमा रहे हैं। वहीं भजन गंगा में भी डुबकियां लगा जीवन सफल बना रहे हैं। इस मौके बड़ी गिनती में श्रद्धालु उपस्थित थे जिन्होंने स्वामी श्री सुशांतानंद गिरि जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त कर जीवन धन्य बनाया।गौरतलब है कि जैतो स्थित श्री कल्याण कमल सन्यास आश्रम में 15 दिवसीय श्रीमद् भागवत प्रवचन कार्यक्रम का आयोजन हो रहा है । यह कार्यक्रम 21 सितंबर तक चलेगा। कथा दौरान रोजाना बड़ी गिनती में श्रद्धालु पहुंच कर पितृ पक्ष में स्वामी श्री सुशांतानंद गिरि जी महाराज के मुखारविंद से श्रीमद् भागवत रसपान कर रहे हैं। जैतो स्थित श्री सन्यास आश्रम में प्रवचन करते हुए स्वामी श्री सुशांतानंद गिरि जी महाराज एवं उपस्थित श्रद्धालु।



